पंडित पंत की दूरदृष्टि और संघर्षों से प्रेरणा लें युवा: ऋतु खंडूड़ी

:- 139वीं जयंती पर भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत को किया याद, सात प्रतिभाओं को मिला ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान

देहरादून, 10 सितम्बर। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कुशल राजनेता, भारत के पूर्व गृह मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर देहरादून के आईआरडीटी सभागार में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती समारोह समिति एवं हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में वक्ताओं ने पंडित पंत के व्यक्तित्व, कृतित्व और संघर्षों को याद करते हुए नई पीढ़ी से उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली सात प्रतिभाओं को ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान से सम्मानित किया गया।

समारोह की मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत को कुशल राजनेता, अधिवक्ता और दूरदृष्टा बताते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय राजनीति में मानदंड स्थापित किए। वे सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष करने वाले युगपुरुष थे। उन्होंने कहा कि कुली बेगार प्रथा के खिलाफ पंत का आंदोलन अंग्रेजी शासन के लिए बड़ी चुनौती बना और इस कुप्रथा के अंत का मार्ग प्रशस्त हुआ। तराई-भाबर के विकास को लेकर पंत की दूरदृष्टि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज इस क्षेत्र में दिखाई दे रहा विकास उनकी सोच का परिणाम है। उन्होंने युवाओं से पंत के जीवन और संघर्षों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता नीरज पांडे ने पंडित पंत की जीवन यात्रा और संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा के खूंट गांव से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने से लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक की उनकी यात्रा और इसके बाद उत्तराखंड की सेवा के लिए काशीपुर लौटना उनके जीवन के उद्देश्य को स्पष्ट करता है। काशीपुर में प्रेम सभा के गठन के माध्यम से उन्होंने शोषित, वंचित और पीड़ित लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। संयुक्त प्रांत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यों का भी ऐतिहासिक महत्व रहा।

देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत को आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक बताते हुए कहा कि वे राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रबल समर्थक थे। देश के प्रशासनिक पुनर्गठन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पहाड़ के प्रति उनके विशेष लगाव के कारण उन्हें ‘हिमालय पुत्र’ कहा जाता है। उन्होंने युवाओं से पंडित पंत के जीवन और विचारों का अध्ययन कर उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

सात प्रतिभाओं को ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान

समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सात प्रतिभाओं को ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान से सम्मानित किया गया। महिला सशक्तिकरण एवं उद्यमिता के क्षेत्र में शशि बहुगुणा रतूड़ी, साहित्य लेखन में शीशपाल गुंसाई, शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. ममता सिंह, पत्रकारिता एवं जनसरोकारों के लिए वरिष्ठ पत्रकार अवधेश नौटियाल, पर्यावरण संरक्षण के लिए दरपान सिंह बोरा, स्वरोजगार के क्षेत्र में गोपाल भट्ट और लोकगायन के लिए विवेक नौटियाल को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. नवीन पंत की आने वाली पुस्तक ‘युवा उत्तराखंड : शिक्षा, कौशल एवं आत्मनिर्भरता’ के कवर पृष्ठ का भी लोकार्पण किया गया। समारोह में सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, महिला आईटीआई, उत्तरांचल विश्वविद्यालय और तुलाज विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने योग, लोकनृत्य, लोकगायन और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह भर दिया। अतिथियों ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम संयोजक राकेश डोभाल ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती समारोह समिति और हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान हर वर्ष पंत की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित कर युवा पीढ़ी को उनके जीवन, संघर्ष और विचारों से परिचित कराने का प्रयास कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन पंत ने किया, जबकि सह-संयोजक प्रदीप कुमार ने अतिथियों का आभार जताया।

समारोह में 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री ज्योति प्रसाद गैरोला, डॉ. भावना डोभाल, जीएमवीएन के निदेशक विशाल गुप्ता, साक्षी शंकर, सुधाकर भट्ट, नीतू कुमारी, प्रभात कुमार, अवधेश तिवारी, बृजपाल सिंह, शमशेर सिंह, दीपा धामी, अनिल रस्तोगी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
।।।।।।।।।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *