‘मन की प्यारी’ गीत को मिल रहा प्यार, नागराजा के जागर को तीन माह में 18 हजार से अधिक लोगों ने देखा
देहरादून। लोक गायक एवं गीतकार राजेंद्र जोशी ने करीब 20 साल बाद क्षेत्रीय सिनेमा और लोक संगीत के क्षेत्र में दोबारा सक्रिय वापसी की है। उनके नए गढ़वाली गीत ‘मन की प्यारी’ को श्रोताओं का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। गीत गंगा स्टूडियो के बैनर तले तैयार यह गीत 24 सितंबर की रात उनके यूट्यूब चैनल @rajendrajoshi77 पर रिलीज किया गया। गीत के गीतकार और लोक गायक स्वयं राजेंद्र जोशी हैं, जबकि संगीत ज्योति प्रकाश पंत ने दिया है।
राजेंद्र जोशी इससे पहले ऋषि फिल्म के बैनर तले ‘मां जोगमाया’, टी सीरीज के बैनर तले ‘स्याली सुनीता’ एलबम के साथ ही भगवान नागराजा पर आधारित जागर के माध्यम से अपनी पहचान बना चुके हैं। इसी क्रम में उन्होंने अब ‘मन की प्यारी’ खुदेड़ गीत श्रोताओं के बीच प्रस्तुत किया है। रिलीज के बाद से ही गीत को दर्शकों का प्यार मिल रहा है और यूट्यूब पर इसे अब तक तीन हजार से अधिक लोग देख चुके हैं। भगवान नागराजा पर आधारित जागर गीत और मन की प्यारी गढ़वाली गीत दोनों में संगीत ज्योति प्रकाश पंत जी ने दिया है। यह दोनों गीत उनके गीत गंगा स्टूडियो में रिकॉर्ड हुए हैं।
इससे पहले राजेंद्र जोशी द्वारा प्रस्तुत भगवान नागराजा पर आधारित जागर को भी लोगों ने पसंद किया। करीब तीन महीने पहले रिलीज हुए इस जागर गीत को यूट्यूब पर 25 हजार से अधिक लोग ऑडियो/वीडियो देख चुके हैं। जबकि 42 हजार के करीब लोग शॉर्ट वीडियो देख चुके हैं।
होटल व्यवसाय के साथ संगीत का जुनून
मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के बगोड़ी गांव निवासी राजेंद्र जोशी वर्तमान में उत्तरकाशी में रहते हैं, जहां वह रेस्टोरेंट संचालित करते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट राजेंद्र जोशी पेशे से होटलियर हैं और गुजरात सहित कई स्थानों के बड़े होटलों में काम कर चुके हैं। हालांकि बचपन से ही उन्हें गीत-संगीत का शौक रहा। धीरे-धीरे उन्होंने खुद गीत लिखना और बनाना भी शुरू किया।
राजेंद्र जोशी अब तक 30 से अधिक गीत बना चुके हैं, जिनमें से अधिकांश गीतों को उन्होंने स्वयं आवाज दी है। उनका कहना है कि उन्हें गीत गाने से जितना आनंद मिलता है, उससे अधिक खुशी गीत बनाने में मिलती है। हालांकि गीत लेखन के लिए काफी मेहनत, एकाग्रता और धैर्य की जरूरत होती है। जिस विषय या क्षेत्र पर गीत लिखा जा रहा है, उसके बारे में पूरी जानकारी और शब्दों की समझ होना भी जरूरी है।
उतार-चढ़ाव के बाद फिर संगीत की ओर लौटे
राजेंद्र जोशी के मुताबिक हर व्यक्ति की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं और उनकी जिंदगी में भी ऐसा दौर आया। इसी वजह से वह करीब 20 साल तक इस क्षेत्र से दूर रहे। इस वर्ष उन्होंने फिर से संगीत की दुनिया में वापसी की और जून में भगवान नागराजा पर आधारित जागर प्रस्तुत किया। इस गीत को श्रोताओं ने सराहा और इसके बाद उन्होंने लगातार अपने नए गीतों पर काम शुरू किया।
वह बताते हैं कि उनकी वापसी में परिवार, गांव के लोगों और रिश्तेदारों का भी उत्साहवर्धन और सहयोग मिला। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति कुछ अच्छा करने की कोशिश करता है तो उसके आसपास के लोग भी उसका साथ देते हैं।
नए कलाकारों को निरंतर प्रयास का संदेश
राजेंद्र जोशी ने युवा गायकों और कलाकारों को संदेश देते हुए कहा कि कई बार किसी कलाकार का गीत अच्छा होने के बावजूद किसी कारण से अपेक्षित रूप से लोगों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे समय में निराश होने के बजाय अपने काम को उसी उत्साह और निरंतरता के साथ जारी रखना चाहिए। सफलता एक दिन जरूर मिलती है। इसके लिए अच्छे लोगों से जुड़ना और जिस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, उसका पूरा ज्ञान हासिल करना जरूरी है।