:- उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने 2026 में प्रवेश लेने वाले छात्रों की शैक्षणिक योग्यता जांचने के दिए निर्देश, पढ़ाई पूरी करने के बाद पंजीकरण में आने वाली दिक्कतों को लेकर संस्थानों को किया आगाह
देहरादून। फार्मेसी पाठ्यक्रम में दाखिला लेने जा रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। इंटरमीडिएट में निर्धारित विज्ञान विषयों में पात्रता पूरी नहीं करने के बावजूद यदि किसी छात्र को डीफार्मा या बीफार्मा में प्रवेश मिल जाता है, तो पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद भी उसका फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण अटक सकता है। ऐसे मामलों को देखते हुए उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने प्रदेश के सभी फार्मेसी शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2026 में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की शैक्षणिक पात्रता की अनिवार्य रूप से जांच करने के निर्देश दिए हैं।
काउंसिल के रजिस्ट्रार केएस फर्स्वाण ने सभी संबंधित संस्थानों को पत्र भेजकर कहा है कि अभ्यर्थियों को प्रवेश देने से पहले उनकी इंटरमीडिएट की अंकतालिका और निर्धारित शैक्षणिक पात्रता की जांच की जाए। काउंसिल के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले छात्रों को भी फार्मेसी पाठ्यक्रमों में प्रवेश दे दिया गया। छात्रों ने दो से चार वर्ष तक पढ़ाई पूरी की, लेकिन पंजीकरण के लिए काउंसिल पहुंचने पर उनकी पात्रता पूरी नहीं होने की जानकारी सामने आई और उनका पंजीकरण नहीं हो सका।
एक विषय में फेल होने पर भी अटक सकता है पंजीकरण
फार्मेसी एक्ट, 1948 के तहत बनाए गए एजुकेशन रेगुलेशन-2020 के अनुसार फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए इंटरमीडिएट में विज्ञान वर्ग से उत्तीर्ण होना जरूरी है। निर्धारित पात्रता के तहत भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान तथा गणित या जीव विज्ञान विषयों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। बीफार्मा के लिए अंग्रेजी विषय भी अनिवार्य है। निर्धारित विषयों में पात्रता पूरी नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए।
फीस और पढ़ाई पूरी करने के बाद सामने आती है कमी
काउंसिल के मुताबिक प्रवेश के समय शैक्षणिक योग्यता की उचित जांच नहीं होने से छात्रों को बाद में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। छात्र फीस जमा करने के साथ कई वर्ष पढ़ाई में लगा देते हैं, लेकिन पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद पंजीकरण के समय उनकी पात्रता में कमी सामने आती है। इससे छात्रों का समय और पैसा दोनों प्रभावित होते हैं। ऐसे मामलों को लेकर कई अभ्यर्थियों की ओर से हाई कोर्ट में वाद भी दायर किए गए हैं।
96 कॉलेज, 24 विश्वविद्यालय और 21 पॉलीटेक्निक में संचालित हैं पाठ्यक्रम
प्रदेश में 96 कॉलेज, 24 विश्वविद्यालय और 21 पॉलीटेक्निक में फार्मेसी के विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इनमें दो वर्षीय डीफार्मा, चार वर्षीय बीफार्मा, छह वर्षीय फार्मडी और दो वर्षीय एमफार्मा पाठ्यक्रम शामिल हैं।
काउंसिल ने बताया कि संस्थानों को पहले भी प्रवेश के समय अभ्यर्थियों की इंटरमीडिएट की अंकतालिका और निर्धारित पात्रता की जांच करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। पिछले वर्ष भी इस संबंध में संस्थानों को आगाह किया गया था।
अब वर्ष 2026 के दाखिलों को लेकर काउंसिल ने एक बार फिर संस्थानों को पात्रता जांच में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं, ताकि पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों के फार्मासिस्ट पंजीकरण में किसी तरह की समस्या या विवाद की स्थिति पैदा न हो और उनका भविष्य प्रभावित न हो।