:- इप्टा उत्तराखंड और अहल-ए-सुख़न देहरादून के संयुक्त आयोजन में शायरों ने अपने कलाम से बांधा समां
देहरादून। बुधवार, 9 सितंबर 2026 को देहरादून स्थित तस्मिया अकादमी, निकट द्वारिका स्टोर में इप्टा (उत्तराखंड) और अहल-ए-सुख़न (देहरादून) के संयुक्त तत्वावधान में एक शानदार काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम लखनऊ के मशहूर शायर ओम प्रकाश ‘नदीम’ के सम्मान में आयोजित हुआ। साहित्य और शायरी से जुड़े लोगों की मौजूदगी में सजी इस महफिल में शायरों ने अपने कलाम से देर तक श्रोताओं को बांधे रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता तस्मिया अकादमी के संस्थापक डॉ. एस. फ़ारूक ने की, जबकि कार्यक्रम की निज़ामत (संचालन) मशहूर शायर अफ़ज़ल मंगलौरी ने की।
काव्य संध्या का आगाज इप्टा के साथी सतीश धौलाखंडी ने जनगीत की प्रस्तुति से किया। इसके बाद शायरी का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें ओम प्रकाश ‘नदीम’, ओमप्रकाश ‘नूर’ (रुड़की), असलम खतौलवी (रुड़की), अफ़ज़ल मंगलौरी (रुड़की), परमवीर कौशिक (देहरादून), दर्द गढ़वाली (देहरादून) और राज कुमार ‘राज’ (देहरादून) ने अपने-अपने कलाम पेश कर महफिल को यादगार बना दिया।
शायरों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने जमकर दाद दी। कार्यक्रम में साहित्य, कविता और शायरी के प्रति लोगों का उत्साह देखने को मिला। काव्य संध्या ने सांस्कृतिक संवाद और साहित्यिक सरोकारों को मजबूत करने का संदेश भी दिया।
इस अवसर पर इप्टा उत्तराखंड राज्य समिति के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के सह-आयोजक डॉ. वी.के. डोभाल ने सभी अतिथियों, शायरों और उपस्थित श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि साहित्य और कला से जुड़े लोगों को एक साझा मंच मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत पंक्तियां—
“पर्वत, पेड़, परिंदे, झरने, पास में दरिया,
अपने लिए तो यही ठिकाना ठीक रहेगा।”
ने प्रकृति, संवेदना और इंसानी जुड़ाव की खूबसूरत तस्वीर की।