:- STF साइबर कुमाऊं यूनिट की बाजपुर में बड़ी कार्रवाई, 114 सिम कार्ड और 2 SIM Box समेत टेलीकॉम उपकरण बरामद
देहरादून/बाजपुर, 22 सितंबर 2026। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की साइबर कुमाऊं यूनिट ने बाजपुर, ऊधमसिंहनगर में SIM Box के माध्यम से संचालित किए जा रहे अवैध टेलीकॉम गेटवे का भंडाफोड़ किया है। STF के अनुसार, यह उत्तराखंड में SIM Box के जरिए संचालित अवैध टेलीकॉम गेटवे के खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 114 Airtel सिम कार्ड, 2 SIM Box, 77 एंटीना, इंटरनेट राउटर, मोबाइल फोन और अन्य टेलीकॉम उपकरण बरामद किए हैं।
STF के मुताबिक, कार्रवाई मुख्यमंत्री के साइबर अपराध मुक्त उत्तराखंड के संकल्प और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के दिशा-निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन हॉट स्पॉट अभियान के तहत की गई।
बाजपुर के मकान में चल रहा था अवैध गेटवे
STF को काफी समय से SIM Box के माध्यम से अवैध टेलीकॉम गेटवे संचालित किए जाने की सूचना मिल रही थी। इस संबंध में टीम दूरसंचार विभाग (DoT) के लगातार संपर्क में थी। इनपुट के आधार पर साइबर कुमाऊं टीम ने बाजपुर के मुड़िया, ईदगाह के पास स्थित एक मकान में दबिश दी।
दबिश के दौरान वहां SIM Box के माध्यम से अवैध टेलीकॉम गेटवे संचालित करने के आरोप में कादिर पुत्र जाबिर अली (24 वर्ष), निवासी मिलक जुम्मावाली, ग्राम बेरखेड़ा चक, थाना भगतपुर, जिला मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार किया गया।
विदेशी और VoIP कॉल को भारतीय नंबर में बदलने का आरोप
जांच में सामने आया कि SIM Box के जरिए विदेशी और इंटरनेट आधारित VoIP कॉल्स को भारतीय लोकल मोबाइल कॉल के रूप में परिवर्तित किया जा रहा था। इसके चलते कॉल प्राप्त करने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर विदेशी नंबर के बजाय भारतीय मोबाइल नंबर दिखाई देता था।
STF के अनुसार, इस व्यवस्था से कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान और लोकेशन छिपाने में मदद मिलती थी। गेटवे में अलग-अलग व्यक्तियों की आईडी का दुरुपयोग कर हासिल किए गए सिम कार्डों का इस्तेमाल किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
बांग्लादेश के साइबर अपराधियों से संपर्क की जांच
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी के बांग्लादेश के साइबर अपराधियों के संपर्क में होने तथा उनके माध्यम से आर्थिक लाभ प्राप्त करने की बात सामने आई है। आरोपी ने पूछताछ में इस अवैध गेटवे को करीब सात माह से संचालित किए जाने की जानकारी दी है।
STF के अनुसार, आरोपी पूर्व में भी साइबर अपराधियों के संपर्क में रहा है। वर्ष 2023 में थाना कटघर, मुरादाबाद में SIM Box के जरिए अवैध टेलीकॉम गेटवे संचालित करने के मामले में उसे गिरफ्तार किया जा चुका है और वर्तमान में वह जमानत पर है।
STF अब आरोपी के साइबर नेटवर्क, विदेशी संपर्कों, बैंक खातों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में विस्तृत जांच कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी में भी इस्तेमाल
STF की जांच में SIM Box के साइबर अपराधों में इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। इसके जरिए विदेशी/VoIP कॉल को भारतीय मोबाइल नंबर के रूप में प्रदर्शित करने, कॉलर की वास्तविक पहचान और लोकेशन छिपाने तथा फर्जी या दूसरे लोगों के दस्तावेजों पर जारी सिम कार्डों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, ऐसी तकनीक का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, फर्जी अधिकारी बनकर ठगी और अन्य साइबर अपराधों में भी किया जा सकता है। इसके अलावा अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज के जरिए सरकारी राजस्व और टेलीकॉम कंपनियों को आर्थिक नुकसान पहुंचने की आशंका भी रहती है।
यह सामान हुआ बरामद
2 SIM Box (32 स्लॉट)
77 SIM Box एंटीना
114 Airtel SIM कार्ड
1 Airtel इंटरनेट राउटर
1 Samsung A35 मोबाइल फोन, सिम सहित
LAN/USB केबल एवं कनेक्टर
2 AC Adapter और 2 Power Cable
1 फाइबर वायर
1 मीडिया कन्वर्टर
1 एक्सटेंशन बोर्ड
अन्य टेलीकॉम उपकरण
आरोपी का आपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ मुरादाबाद के थाना कटघर में वर्ष 2023 में दो मामले दर्ज हैं। इनमें एक मामला धोखाधड़ी, जालसाजी और भारतीय तार अधिनियम की धाराओं से संबंधित है, जबकि दूसरा मामला गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज है।
STF का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों पर सिम उपलब्ध कराने वाले एजेंटों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
STF टीम ने की कार्रवाई
कार्रवाई करने वाली टीम में निरीक्षक अरुण कुमार, निरीक्षक एमपी सिंह, उपनिरीक्षक शंकर सिंह रावत, उपनिरीक्षक अशोक कांडपाल, उपनिरीक्षक प्रकाश भगत, अपर उपनिरीक्षक सत्येंद्र गंगोला, हेड कांस्टेबल गोविंद सिंह, हेड कांस्टेबल मोहित वर्मा, हेड मनोज कुमार, कांस्टेबल मुहम्मद उस्मान, कांस्टेबल प्रवीण आगरी और कांस्टेबल गुरवंत सिंह शामिल रहे।
STF के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि SIM Box जैसी तकनीक के जरिए पहचान छिपाने का प्रयास करने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ आधुनिक साइबर फॉरेंसिक और तकनीकी संसाधनों की मदद से कार्रवाई जारी है। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।