10 लाख रुपये की लागत से शुरू किया बेकरी कारोबार, हर माह 50 से 60 हजार रुपये की आय—30 से 40 हजार रुपये तक शुद्ध लाभ
टिहरी गढ़वाल। विकासखंड थौलधार के ग्राम भैंसकोटी की सात महिलाओं ने ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से स्वरोजगार की नई मिसाल कायम की है। कभी घरेलू कार्य, खेती और पशुपालन तक सीमित रहने वाली राजेश्वरी सकलानी, गीता भट्ट, आशा देवी, रजनी, अनीता, विशिला देवी और शकुन्तला देवी आज बेकरी उद्यम के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
भैंसकोटी की ये महिलाएं दिव्य ग्राम संगठन से जुड़ी हैं। संगठन के अंतर्गत शिवालय स्वयं सहायता समूह, संतोषी समूह और लक्ष्मी समूह की महिलाओं ने जनवरी 2026 में ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से बेकरी उद्यम की शुरुआत की। परियोजना के तहत संगठन को 6 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा 3 लाख रुपये का बैंक ऋण और 1 लाख रुपये का स्वयं का अंशदान मिलाकर कुल 10 लाख रुपये की लागत से बेकरी उद्यम स्थापित किया गया।
राजेश्वरी सकलानी बताती हैं कि परियोजना से मिली सहायता से बेकरी के लिए मशीनें और आवश्यक उपकरण खरीदे गए। महिलाओं ने स्थानीय पसंद और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए मंडुवा बिस्किट, आटा बिस्किट, मशरूम बिस्किट, फैन, बन, ब्रेड और केक सहित विभिन्न उत्पाद तैयार करने शुरू किए। इन उत्पादों की बिक्री थौलधार, कमांद, कांडीखाल और टिहरी के बाजारों में की जा रही है।
महिलाओं के इस उद्यम से वर्तमान में हर माह लगभग 50 से 60 हजार रुपये की आय हो रही है, जिसमें करीब 30 से 40 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया जा रहा है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और परिवारों को आत्मनिर्भरता की नई राह मिली है।
महिलाओं का कहना है कि पहले उनका अधिकांश समय घरेलू कार्य और खेती-किसानी में ही बीतता था। ग्रामोत्थान परियोजना ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और उसे व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया। अब वे स्वयं व्यवसाय का संचालन कर रही हैं, बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार कर रही हैं और अपनी मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं।
महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिला प्रशासन और ग्रामोत्थान परियोजना की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं और सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। अब उनका लक्ष्य कारोबार का विस्तार करना और अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ना है।
प्रभारी परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ज्योति ने बताया कि ग्रामोत्थान परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय संसाधनों तथा उनकी क्षमता के अनुरूप स्वरोजगार से जोड़ना है। भैंसकोटी की महिलाओं की सफलता इसका उदाहरण है कि उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं।
भैंसकोटी की महिलाओं की यह सफलता ‘सरकारी सहयोग, महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भर गांव’ की प्रेरक तस्वीर पेश करती है। ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को इससे नई मजबूती मिली है।