:- स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर तीन अभ्यर्थियों को दाखिला दिलाने का आरोप, SIT जांच में सामने आए अहम तथ्य
देहरादून, 22 सितंबर 2026। नीट यूजी 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस की एसआईटी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रूपेश पंडित, निवासी पूर्णिया बिहार, हाल निवासी मेरठ और अरविंद कुमार, निवासी लक्सर, हरिद्वार के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में अलग-अलग शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें आरोप था कि कुछ अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किए थे। जांच के दौरान आवेदन में लगाए गए दस्तावेज कथित रूप से फर्जी पाए गए। मामले में थाना रायपुर में मुकदमा अपराध संख्या 380/26 तथा थाना क्लेमेंटाउन में मुकदमा अपराध संख्या 86/26 दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। जांच के दौरान कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। इसके बाद टीम ने संबंधित शिक्षण संस्थानों में पहुंचकर दाखिले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की, जिससे अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी सामने आई।
45 लाख रुपये में दाखिले का आरोप
पुलिस की पूछताछ में सामने आए तथ्यों के अनुसार, आरोपी रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। वह मेरठ में MECODO पाठशाला नाम से कंपनी संचालित करता था और विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों तथा विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम सहित अन्य पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर प्रवेश दिलाने का काम करता था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अरविंद कुमार रूपेश का पुराना परिचित था। उसने अपनी पुत्री परी सहित तीन अभ्यर्थियों के एमबीबीएस में दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। आरोप है कि रूपेश और उसके साथियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के माध्यम से दाखिला दिलाने की बात कही और प्रत्येक दाखिले के लिए 45 लाख रुपये लेने की बात तय हुई।
पुलिस के अनुसार, तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से एडवांस के रूप में 20-20 लाख रुपये लिए गए थे। शेष रकम एमबीबीएस में दाखिला होने और कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी।
फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दाखिले का आरोप
एसआईटी जांच में पुलिस का कहना है कि रूपेश पंडित ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर कथित फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए। इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला लिया।
प्राप्त साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए थाना रायपुर लाया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं तथा संभावित अन्य आरोपियों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है। एसआईटी द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।