:- शनिवार रात को घर में घुसकर बंधे हुए कुत्ते पर कर चुका है हमला, महिला ने रस्सी खींचकर बचाया कुत्ता
:- ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुवे को पकड़ने की उठाई मांग, गांव के आसपास जल्द लगाए जाएं पिंजरे
कंडीसौड़़ (टिहरी गढ़वाल)। उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में इन दिनों मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। टिहरी गढ़वाल जिले के बगोड़ी गांव में भी पिछले कुछ दिनों से तेंदुए की धमक ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। गांव में तेंदुए की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो दिन के भीतर तेंदुए ने एक कुत्ते पर हमला किया और सोमवार सुबह एक युवक राधे जोशी गांव के पास ही सोलर प्लांट की देखभाल करने गया था। जहां मादा तेंदुवा अपने बच्चों के साथ थी। अगर युवक की नजर तेंदुवे पर नहीं पड़ती अप्रिय घटना हो सकती थी। उसने भागकर अपनी जान बचाई। इस घटना में वह बाल बाल बच गया। बताया जा रहा है यह मादा तेंदुवा है। जिसके साथ दो बच्चे भी हैं। यह दिन में ग्रामीणों के खेतों में और सड़क में तो शाम होते ही गाँव के नजदीक देखे जा रहे हैं। ग्रामीणों ने इनको पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, दो दिन पहले रात के समय तेंदुए ने अतुल जोशी के घर के पास उनके कुत्ते पर हमला कर दिया। कुत्ते पर हमला होते देख घरवालों ने शोर मचाया, जिसके बाद तेंदुआ वहां से भाग गया। समय रहते परिजनों के शोर मचाने से कुत्ते की जान बच गई।
इसके बाद सोमवार सुबह राधे जोशी रोज की तरह अपने सोलर प्लांट की देखरेख के लिए पहुंचे। उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि वहां उनका सामना जंगल के खतरनाक शिकारी से हो सकता है। सोलर प्लांट के पास पहुंचते ही उनकी नजर अचानक तेंदुए पर पड़ी।
तेंदुए को अपने बेहद करीब देखकर राधे जोशी ने बिना समय गंवाए वहां से भागकर अपनी जान बचाई। इस दौरान हुई पूरी घटना सोलर प्लांट में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। सीसीटीवी फुटेज में तेंदुए की मौजूदगी और उसके अचानक सामने आने की घटना देखी जा सकती है।
लगातार बढ़ रही तेंदुए की सक्रियता से ग्रामीण चिंतित
बगोड़ी गांव में लगातार तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों में डर का माहौल है। खासकर सुबह और शाम के समय लोगों को अकेले घर से बाहर निकलने में भय महसूस हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तेंदुआ इसी तरह आबादी के आसपास घूमता रहा तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने वन विभाग से गांव में गश्त बढ़ाने, तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर उसे पकड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
पहाड़ों में जंगल और आबादी के बीच लगातार घटती दूरी के कारण तेंदुओं का रिहायशी इलाकों में पहुंचना अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। बगोड़ी गांव की यह घटना भी इसी बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक तस्वीर सामने रखती है।
ग्रामीण वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश जोशी, राधे जोशी, शशि जोशी, ऋषभ जोशी, पंकज जोशी, मुन्नी देवी, पंकज जोशी आदि के अनुसार, वन विभाग अगर इन्हें नहीं पकड़ता है तो यह गांव के आसपास किसी भी समय किसी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं। जिसके लिए वन विभाग जिम्मेदार होगा। उनका कहना है कि दहशत के कारण महिलाएं खेतों में निराई गुड़ाई के लिए भी नहीं जा पा रही हैं। बच्चे घरों में कैद होकर रह गए हैं। इन दिनों गांव के आसपास काफी झाड़ियां हैं साथ ही खेतों में फसलें बड़ी बड़ी हो रखी हैं। जिनमें छुपने के लिए तेंदुए के लिए काफी मुफीद है। मादा तेंदुवा इंसान दिखने पर डर भी नहीं रही है। जो कभी भी हमला कर सकती है। बगोड़ी गांव के साथ ही वह नकोट, जसकोट, खमोली, धमाडी, रनकोटी के लोगों के लिए भी दहशत बना हुआ है। हालांकि, इन दिनों ज्यादा सक्रिय वह बगोड़ी गांव के आसपास है। कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने उसे खमोली खाला के पास रोड पर भी बच्चों के साथ देखा था। फिलहाल गांव के जागरूक लोगों की ओर से अन्य ग्रामीणों से सतर्क रहने और विशेषकर सुबह-शाम अकेले सुनसान रास्तों पर न जाने की अपील की जा रही है।