:- सीएम से विदेश मंत्री तक पहुंचाया मामला, परिवार को ₹21 हजार की आर्थिक मदद; बोले—इंद्रमणि की सकुशल वापसी तक जारी रहेगी पैरवी
उत्तरकाशी। सऊदी अरब में पिछले आठ वर्षों से विषम परिस्थितियों में फंसे उत्तराखंड के इंद्रमणि नोटियाल की सकुशल वतन वापसी के लिए पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रदीप भट्ट लगातार प्रयासरत हैं। इंद्रमणि की रिहाई का मामला शासन-प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार तक पहुंचाने के साथ ही प्रदीप भट्ट अब तक विभिन्न स्तरों पर उनकी वापसी के लिए पैरवी कर चुके हैं।
इंद्रमणि नोटियाल के लंबे समय से घर नहीं लौट पाने के कारण उनका परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है। परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए प्रदीप भट्ट ने इंद्रमणि की पुत्री दीपिका नोटियाल को अपनी ओर से ₹21,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा कि परिवार को तत्काल राहत पहुंचाना भी इस मानवीय प्रयास का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री से की मुलाकात, केंद्र तक पहुंचाया मामला
इंद्रमणि की वतन वापसी के प्रयासों के तहत प्रदीप भट्ट ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया। उन्होंने राज्य सरकार से मामले को केंद्र सरकार के स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने का अनुरोध किया, जिसके बाद प्रकरण को केंद्र तक पहुंचाया गया।
विदेश मंत्री से भी की सीधी मुलाकात
मामले में कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदीप भट्ट ने नई दिल्ली में केंद्रीय विदेश मंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने इंद्रमणि नोटियाल की स्थिति से अवगत कराते हुए उनकी जल्द से जल्द सुरक्षित भारत वापसी के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
प्रदीप भट्ट का कहना है कि इंद्रमणि की समस्या केवल एक परिवार की परेशानी नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदना से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा, “इंद्रमणि नोटियाल हमारे क्षेत्र के परिवार का हिस्सा हैं। आठ वर्षों से उनका परिवार जिस मानसिक और आर्थिक पीड़ा से गुजर रहा है, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। मेरी प्राथमिकता उन्हें सकुशल भारत वापस लाना है। जब तक वे अपने परिजनों के बीच नहीं पहुंच जाते, मेरा प्रयास जारी रहेगा।”
इंद्रमणि की वतन वापसी के लिए जारी प्रयासों और परिवार को आर्थिक सहयोग देने पर क्षेत्र के ग्रामीणों एवं प्रबुद्ध लोगों ने प्रदीप भट्ट के प्रयासों की सराहना की है। उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में प्रशासनिक एवं कूटनीतिक स्तर पर पैरवी के साथ परिवार को आर्थिक सहयोग देना भी संवेदनशील पहल है।