पहली बार 6 छक्के मारने वाले वेस्टइंडीज के पूर्व क्रिकेटर गैरी साइबर्स (सर गारफील्ड सोबर्स)का निधन

क्रिकेट के महानतम ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स का 89 वर्ष की उम्र में निधन
1958 में 365 रन की ऐतिहासिक पारी, 93 टेस्ट में 8,032 रन और 235 विकेट; बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों में रचा स्वर्णिम इतिहास

स्पोर्ट्स डेस्क, मोनाल एक्सप्रेस। क्रिकेट जगत ने अपने सबसे महान खिलाड़ियों में से एक को खो दिया। वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान और विश्व क्रिकेट के महानतम ऑलराउंडर माने जाने वाले सर गारफील्ड सेंट ऑबर्न सोबर्स (गैरी सोबर्स) का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में शोक की लहर है।

गैरी साइबर्स। फाइल फोटो
साभार सोशल मीडिया

28 जुलाई 1936 को बारबाडोस में जन्मे सर गारफील्ड सोबर्स ने वर्ष 1954 में इंग्लैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और 1974 तक वेस्टइंडीज का प्रतिनिधित्व किया। अपने दो दशक लंबे करियर में उन्होंने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए, जिनके कारण उन्हें क्रिकेट इतिहास का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर माना जाता है।

सोबर्स ने अपने करियर में 93 टेस्ट मैचों में 57.78 की शानदार औसत से 8,032 रन बनाए। इसके साथ ही उन्होंने 235 विकेट भी अपने नाम किए। उनकी सबसे यादगार उपलब्धि वर्ष 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई नाबाद 365 रन की पारी रही, जो 36 वर्षों तक टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बनी रही।

गैरी साइबर्स। फाइल फोटो
साभार सोशल मीडिया

वर्ष 1968 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए उन्होंने एक ही ओवर में लगातार छह छक्के लगाकर इतिहास रच दिया। वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने।

सर गारफील्ड सोबर्स की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। वह बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज होने के साथ-साथ बाएं हाथ से तेज गेंदबाजी, लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिन और रिस्ट स्पिन—तीनों तरह की गेंदबाजी करने में सक्षम थे। इसके अलावा उन्हें विश्व क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ फील्डरों में भी गिना जाता था।

क्रिकेट के महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने उन्हें इतिहास का सर्वश्रेष्ठ “फाइव-इन-वन” खिलाड़ी बताया था। ब्रैडमैन के अनुसार सोबर्स बल्लेबाजी, स्विंग गेंदबाजी, स्पिन गेंदबाजी, फील्डिंग और कप्तानी—इन सभी भूमिकाओं में समान रूप से उत्कृष्ट थे।

गैरी साइबर्स। फाइल फोटो
साभार सोशल मीडिया

क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान को सम्मान देते हुए 1975 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें ‘नाइटहुड’ (Sir) की उपाधि से सम्मानित किया था।

सर गारफील्ड सोबर्स का निधन केवल वेस्टइंडीज ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व क्रिकेट के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके रिकॉर्ड, बहुमुखी प्रतिभा और खेल भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

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