:- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों से किया संवाद, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता देने का किया आह्वान
देहरादून, 19 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी हैं। उन्होंने युवा वन अधिकारियों से आधुनिक तकनीक, प्रशासनिक दक्षता और संवेदनशीलता के साथ वन संरक्षण को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन एवं उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) श्री गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक श्रीमती अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं परिवीक्षार्थी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की धरती पर स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन को सादगी, समर्पण, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की प्रेरणादायी यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर देश के द्वितीय सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
करीब 70 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र, संरक्षण बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां के पर्वत, नदियां, वन एवं जैव विविधता राज्य की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के बीच वन अधिकारियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों को वन संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों और आजीविका को भी प्राथमिकता देनी होगी।
इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है। ‘मिशन LiFE’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार का प्रयास है कि विकास परियोजनाएं पर्यावरण की कीमत पर नहीं, बल्कि इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन स्थापित करते हुए आगे बढ़ें।
13 हजार एकड़ वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में देश के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक के तहत लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसका शीघ्र ही प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में विस्तार किया जाएगा।
एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर बना संतुलित विकास का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उल्लेख करते हुए कहा कि राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले मार्ग पर लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का निर्माण आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का प्रभावी उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देना है, जिनसे विकास भी हो और प्राकृतिक संसाधनों तथा वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
वन पंचायतों और ग्रामीणों के हितों पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन उपज के परिवहन को सुगम बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है।
वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए उत्तराखंड वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा की व्यवस्था की गई है, जबकि पिरुल एकत्रीकरण के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल और 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा संतुलन कायम करना है, जिसमें वन एवं वन्यजीव सुरक्षित रहें और वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका एवं समृद्धि भी सुनिश्चित हो।
राष्ट्रहित और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें युवा अधिकारी
मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों से कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के अनुरूप देश में वनों एवं पर्यावरण के व्यापक संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में युवा वन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने युवा अधिकारियों से आह्वान किया कि वे जहां भी अपनी सेवाएं दें, वहां राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील एवं जिम्मेदार प्रशासन की मिसाल कायम करें।