नर्सिंग भर्ती में ‘वर्षवार चयन’ की मांग तेज, उपेक्षित बैचों ने उठाए सवाल

:- 3000 पदों की प्रक्रिया पर असमानता का आरोप

• 144वें दिन धरना, 9वें दिन आमरण अनशन

• दो अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

देहरादून। उत्तराखंड में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नर्सिंग एकता मंच ने वर्षवार आधार पर लंबित चयन प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग उठाते हुए भर्ती में असमानता के गंभीर आरोप लगाए हैं। मंच का कहना है कि पूर्व में लगभग 3000 पदों पर हुई भर्ती के कई अभ्यर्थी वर्षों से चयन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

मंच के पदाधिकारी पिछले 144 दिनों से सहस्त्रधारा रोड स्थित एकता विहार धरना स्थल पर आंदोलनरत हैं, जबकि आमरण अनशन 9वें दिन में प्रवेश कर चुका है। उनका आरोप है कि एक ही बैच के कुछ अभ्यर्थियों का चयन वर्षवार प्रक्रिया में हो गया, लेकिन समान योग्यता रखने वाले कई अन्य अभ्यर्थी अब भी वंचित हैं। विशेष रूप से बीच के 3-4 बैच पूरी तरह उपेक्षित रह गए हैं।

संगठन ने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया में रिक्त पद, फर्जी प्रमाण-पत्रों के चलते निरस्त चयन और डुप्लीकेट आवेदनों से बनी खाली सीटों के बावजूद योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिला, जो चयन प्रणाली की खामियों को उजागर करता है। मंच के अनुसार आरक्षित वर्ग में वर्ष 2020-21 तक चयन हो चुका है, जबकि सामान्य वर्ग के 2014 तक के अभ्यर्थी अब भी इंतजार में हैं।

मंच ने मांग की है कि वर्तमान भर्ती को वर्षवार आधार पर पूरा किया जाए, भविष्य की भर्तियों में न्यूनतम दो वर्ष का क्लिनिकल अनुभव अनिवार्य किया जाए और चयन प्रक्रिया में सख्त अनुशासनात्मक प्रावधान जोड़े जाएं। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

इधर, आमरण अनशन के दौरान दो अभ्यर्थियों—बबली और हिमांशी—की तबीयत बिगड़ने से स्थिति और गंभीर हो गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों को कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया है। लगातार बिगड़ती सेहत के बावजूद अनशन पर बैठे अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अडिग हैं।

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