चारधाम यात्रा: ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में ‘पहाड़ी स्वाद’ का तड़का

:- कापली-भात, तिल की चटनी, जंगोरे की खीर और मंडवे की रोटी के मुरीद हुए तीर्थयात्री

:- सीएम धामी की पहल और डीएम सविन बंसल की निगरानी में शानदार व्यवस्थाएं

:- महिला समूहों के हाथों से परोसे जा रहे पारंपरिक व्यंजन

ओम प्रकाश जोशी, देहरादून, 22 अप्रैल 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत ऋषिकेश नगर निगम द्वारा ट्रांजिट कैंप में चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन और निगरानी में संचालित इन व्यवस्थाओं के तहत स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह यात्रियों को पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन परोस रहे हैं, जो श्रद्धालुओं के बीच खासे लोकप्रिय हो रहे हैं।

ट्रांजिट कैंप में उड़द दाल के पकोड़े, कापली भात, तिल की चटनी, जंगोरे की खीर और मंडवे की रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर यात्री न केवल उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति से परिचित हो रहे हैं, बल्कि उन्हें पौष्टिक भोजन भी मिल रहा है। इन व्यंजनों का आनंद लेने के बाद श्रद्धालु उत्साह के साथ अपनी आगे की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं।

उपासना जन सेवा स्वायत्त सहकारिता संगठन से जुड़ी 12 महिला समूह इस पहल से जुड़े हैं। इन समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे व्यंजनों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। यह पहल महिलाओं की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बिहार से आए यात्री अरुण कुमार ने बताया कि पारंपरिक व्यंजनों के जरिए उन्हें उत्तराखंड की संस्कृति और स्वाद का अनूठा अनुभव मिल रहा है। उन्होंने इन व्यंजनों को स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक बताया।

गणपति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुनीता बंसल ने कहा कि ट्रांजिट कैंप में स्टॉल लगाने का अवसर मिलने से महिलाओं को अपनी आजीविका मजबूत करने का मंच मिला है। उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की।

चारधाम यात्रा के दौरान यह पहल एक ओर जहां श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं दे रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए एक सकारात्मक उदाहरण भी पेश कर रही है। ट्रांजिट कैंप में ठहराव के दौरान यात्री पहाड़ी स्वाद का आनंद लेते हुए अपनी यात्रा को और भी यादगार बना रहे हैं।

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