10 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्राम प्रधानों का सचिवालय कूच, बैरिकेडिंग तोड़ी

:- परेड ग्राउंड से निकले सैकड़ों ग्राम प्रधान, पुलिस ने रोका तो हुई तीखी झड़प; सड़क पर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी

देहरादून। अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों ने बुधवार को देहरादून में सचिवालय कूच किया। परेड ग्राउंड में एकत्रित होने के बाद ग्राम प्रधानों ने सभा की और इसके बाद जुलूस की शक्ल में सचिवालय की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पुलिस मुख्यालय और सुभाष रोड से पहले बैरिकेडिंग की थी। आगे बढ़ने से रोके जाने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई।

प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित ग्राम प्रधानों ने पुलिस द्वारा लगाई गई पहली बैरिकेडिंग को तोड़ दिया। इसके बाद मौके पर तैनात पुलिस बल और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की होती रही। स्थिति तनावपूर्ण होने पर कई प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने की मांग

ग्राम प्रधान संगठन की प्रमुख मांगों में ग्राम प्रधानों का न्यूनतम मानदेय 20 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग शामिल है। इसके साथ ही ग्राम पंचायत वार्ड सदस्यों को भी बैठकों में शामिल होने के लिए मानदेय देने की मांग की गई है।

मनरेगा में ऑफलाइन हाजिरी की मांग

ग्राम प्रधानों ने पहाड़ी क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या का हवाला देते हुए मनरेगा में ऑनलाइन हाजिरी (NMMS) की व्यवस्था में आ रही दिक्कतों को उठाया। उनकी मांग है कि श्रमिकों की उपस्थिति को पूरी तरह ऑफलाइन किया जाए।

अकुशल श्रमिकों के लिए 600 और कुशल के लिए 800 रुपये मजदूरी

ग्राम प्रधानों ने मनरेगा के तहत अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन और कुशल श्रमिकों की मजदूरी न्यूनतम 800 रुपये प्रतिदिन किए जाने की मांग भी रखी है।

पंचायतों के अधिकार और बजट बढ़ाने की मांग

इसके अलावा ग्राम पंचायतों के अधिकारों की बहाली, विकास कार्यों के बजट में बढ़ोतरी और ग्राम प्रधानों के लिए स्वास्थ्य बीमा सहित अन्य मांगें भी आंदोलन में उठाई गईं।

ग्राम प्रधान संगठन का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के कारण गांवों का विकास प्रभावित हो रहा है। संगठन का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

प्रदेशभर से देहरादून पहुंचे ग्राम प्रधानों के इस प्रदर्शन के दौरान सचिवालय कूच को रोकने के लिए पुलिस की ओर से की गई बैरिकेडिंग और उसके बाद हुई धक्का-मुक्की से आंदोलन ने जोर पकड़ लिया। ग्राम प्रधान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर धरने पर बैठ गए।

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