:- SIT की जांच में सामने आया नेटवर्क; धीरज श्रीवास्तव से ₹5.58 लाख नकद बरामद, पहले गिरफ्तार रूपेश पंडित की निशानदेही पर ₹8 लाख मिले थे
देहरादून, 24 सितंबर। नीट यूजी-2025 में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाकर MBBS में दाखिला दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस की एसआईटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान धीरज कुमार श्रीवास्तव (37) निवासी खजूरी कलान रोड, थाना पिपलानी, जिला भोपाल, मध्य प्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के वाहन टाटा नेक्सॉन (एमपी-04-वाई-0655) की तलाशी के दौरान ₹5,58,100 नकद बरामद किए हैं।
मामले में 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में अलग-अलग अभियोग दर्ज किए गए थे। आरोप है कि अलग-अलग अभ्यर्थियों ने सरकार पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए थे। जांच में उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। थाना रायपुर में मु0अ0सं0 380/26, धारा 318(4), 338/336(2)/340(2) बीएनएस तथा थाना क्लेमेंटाउन में मु0अ0सं0 86/26, धारा 318(4), 338/340(2)/61(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। थाना रायपुर के मामले में विवेचना के दौरान धारा 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई।
एसआईटी ने शिक्षण संस्थानों से जुटाए दस्तावेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने निष्पक्ष जांच और गहन परीक्षण के लिए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। एसआईटी ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने के साथ प्रकरण से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए। जांच में सामने आया कि संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत थे। इसके बाद टीम ने संबंधित शिक्षण संस्थानों में जाकर दस्तावेज कब्जे में लिए, जिनके अवलोकन से अभ्यर्थियों के मूल पतों की जानकारी प्राप्त हुई।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में 21 सितंबर 2026 को रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया गया था। रूपेश पंडित की निशानदेही पर उसके मेरठ स्थित घर से फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के एवज में लिए गए ₹8 लाख नकद बरामद किए गए थे।
MBBS दाखिले के लिए कमीशन पर काम करने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया। वाहन से बरामद ₹5,58,100 के संबंध में पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि यह रकम उसे रूपेश पंडित ने फ्रीडम फाइटर कोटे से कुछ छात्रों को MBBS में दाखिला दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी थी।
पूछताछ में पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि धीरज श्रीवास्तव भोपाल के 46 सी सेक्टर, इंद्रपुरी, थाना पिपलानी में MBBS WAY नाम से कार्यालय संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में MBBS, BTech, BCA, BBA और BCom आदि पाठ्यक्रमों में कमीशन पर दाखिला दिलाने का काम करता था।
पुलिस के अनुसार, धीरज की मुलाकात रूपेश पंडित से करीब दो वर्ष पहले श्रीमती मंजरी देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हिटाणु, उत्तरकाशी में हुई थी। इसके बाद दोनों लगातार संपर्क में थे।
तीन अभ्यर्थियों के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, अरविंद कुमार ने अपनी पुत्री और दो अन्य परिचितों के बच्चों के MBBS दाखिले के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। इसके बाद रूपेश ने धीरज श्रीवास्तव से बात की। पुलिस का कहना है कि धीरज ने अपने एक अन्य साथी से कम मेरिट वाले बच्चों के MBBS दाखिले के संबंध में जानकारी ली, जहां उत्तराखंड में फ्रीडम फाइटर कोटे से दाखिले की बात सामने आई।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद धीरज श्रीवास्तव ने रूपेश पंडित और अन्य साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए। इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS पाठ्यक्रम में दाखिला प्राप्त किया।
एसआईटी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण में सामने आने वाले सभी आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तार आरोपी: धीरज कुमार श्रीवास्तव पुत्र दिवाकर कुमार श्रीवास्तव, निवासी हाउस नंबर 61, खजूरी कलान रोड, थाना पिपलानी, जिला भोपाल, मध्य प्रदेश, उम्र 37 वर्ष।
बरामदगी:
₹5,58,100 नकद — धीरज श्रीवास्तव से
₹8 लाख नकद — रूपेश पंडित की निशानदेही पर
पुलिस टीम: व0उ0नि0 भरत सिंह रावत, अ0उ0नि0 सुशील बलोनी, हे0का0 सोबन सिंह राणा और कां0 किशन पाल।