‘राहुल मियां’ से गरमाई सियासत, वंदे मातरम् पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

हल्द्वानी में नितिन नबीन की टिप्पणी पर कांग्रेस का प्रदर्शन, पुतला फूंका; संजय राउत ने कहा—‘मियां’ का अर्थ भाई भी होता है

:- नितिन नबीन के बयान के बाद विशेषणों की सियासत तेज, भाजपा ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर निशाना साधा, कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला बयान बताया

देहरादून। वंदे मातरम् को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘राहुल मियां’ कहकर संबोधित किए जाने के बाद उत्तराखंड से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक बयानबाजी तेज हो गई है। हल्द्वानी में 9 सितंबर को भाजपा की विस्तारित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान नबीन ने वंदे मातरम् के मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उनके बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में प्रदर्शन कर नबीन का पुतला फूंका और सार्वजनिक माफी की मांग की।

नितिन नबीन ने अपने संबोधन में कहा था कि राहुल गांधी वंदे मातरम् का महत्व नहीं समझ सकते। उनके बयान को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक भाषा और समाज को बांटने की कोशिश से जोड़कर सवाल उठाए। वहीं भाजपा की ओर से वंदे मातरम् के पूर्ण गायन और कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

1937 के फैसले का हवाला दे रही कांग्रेस :-
विवाद के केंद्र में वंदे मातरम् के कितने पद सार्वजनिक कार्यक्रमों में गाए जाएं, यह सवाल भी है। कांग्रेस अपने मौजूदा रुख के समर्थन में 1937 के कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव का हवाला दे रही है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार उस समय औपचारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के शुरुआती दो पदों के इस्तेमाल का निर्णय लिया गया था। कांग्रेस का कहना है कि यह निर्णय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर सहित उस दौर के प्रमुख नेताओं से जुड़े विमर्श के बाद हुआ था।

भाजपा इस फैसले की अपनी राजनीतिक व्याख्या करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल की अपनी टिप्पणियों में 1937 के फैसले को लेकर कांग्रेस पर आरोप लगाए हैं।

‘मियां’ शब्द पर भी सियासत
नितिन नबीन के बयान के बाद शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल भाई या सम्मानजनक संबोधन के तौर पर भी होता है। राउत ने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए भी ‘मियां’ संबोधन का उदाहरण दिया।

दूसरी ओर, उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं ने नबीन के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की। हल्द्वानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन और पुतला दहन के बाद यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया।

‘नाराज फूफा’ से शुरू हुई विशेषणों की सियासत
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी में नए-नए विशेषणों का इस्तेमाल लगातार चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विपक्ष को ‘नाराज फूफा’ कहे जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष के लिए नए-नए विशेषण दिए जा रहे हैं। खरगे ने आरोप लगाया कि इससे सरकार की नीतियों और कथित नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।

भाजपा की ओर से इन टिप्पणियों को विपक्ष की विकास संबंधी मुद्दों पर प्रतिक्रिया के संदर्भ में रखा गया है। इस तरह वंदे मातरम्, राष्ट्रवाद, राजनीतिक भाषा और सरकार-विपक्ष के कामकाज को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर दिखाई दे रहा है।

नितिन नबीन, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष:

“मैं राहुल मियां से कहता हूं… राहुल जी, आप वंदे मातरम् का महत्व समझ ही नहीं सकते।”

संजय राउत, शिवसेना (यूबीटी) सांसद:

“राहुल मियां मतलब राहुल भाई। ‘मियां’ शब्द भाई की तरह इस्तेमाल किया जाता है, इसमें गलत क्या है?”

बोले मल्लिकार्जुन खरगे :
खरगे ने प्रधानमंत्री की ‘नाराज फूफा’ टिप्पणी पर कहा कि विपक्ष के लिए नए-नए विशेषण दिए जा रहे हैं और कांग्रेस का आरोप है कि ऐसी बयानबाजी से सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।

उत्तराखंड कांग्रेस की प्रतिक्रिया:
कांग्रेस नेताओं ने नितिन नबीन के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की और हल्द्वानी में प्रदर्शन कर उनका पुतला फूंका।
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