उत्तरकाशी। उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में हर साल अगस्त माह में मनाया जाने वाला अनूठा बटर फेस्टिवल (अंढूड़ी उत्सव) प्रकृति, लोकसंस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम है। समुद्र तल से करीब 11,000 से 12,000 फीट की ऊंचाई पर आयोजित इस उत्सव में रंगों की जगह लोग दूध, दही, छाछ और मक्खन से एक-दूसरे के साथ होली खेलते हैं।
इस उत्सव का उद्देश्य बुग्यालों में गर्मियों के दौरान चरने वाले दुधारू पशुओं की रक्षा, दूध-दही की प्रचुरता और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ग्रामीण अपने आराध्य सोमेश्वर देवता समेत स्थानीय देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
उत्सव के दौरान स्थानीय आराध्य देवता की डोली यात्रा निकाली जाती है। ढोल-दमाऊं की थाप पर पारंपरिक लोकनृत्य और लोकगीतों की प्रस्तुतियां होती हैं। इसके बाद लोग एक-दूसरे को दूध, दही और मक्खन लगाकर उत्सव की खुशियां मनाते हैं।
रैथल और बारसू से पहुंचते हैं पर्यटक
दयारा बुग्याल पहुंचने के लिए रैथल और बारसू दोनों प्रमुख मार्ग हैं। रैथल गांव से दयारा बुग्याल की दूरी करीब 8 किलोमीटर का पैदल ट्रैक है, जबकि बारसू से करीब 6 किलोमीटर पैदल चलकर दयारा पहुंचा जा सकता है।
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दयारा बुग्याल का यह उत्सव उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपराओं और हिमालयी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। हर वर्ष देश-विदेश से पर्यटक और प्रकृति प्रेमी इस अनोखे उत्सव का हिस्सा बनने के लिए यहां पहुंचते हैं।