जनसरोकारों से ग्लोबल पहचान तक : देहरादून के नए डीएम डॉ. आशीष चौहान की कार्यशैली बनी मिसाल

:- पगडंडियों पर चलकर गांवों तक पहुंचे, बेडू से रोजगार का मॉडल बनाया और छात्रों को सिखाई चाइनीज भाषा

ओम प्रकाश जोशी, देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को नए जिलाधिकारी के रूप में ऐसे प्रशासनिक अधिकारी मिले हैं, जिनकी पहचान सिर्फ एक अफसर के रूप में नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े संवेदनशील प्रशासक और नवाचार करने वाले अधिकारी के रूप में रही है। वर्ष 2012 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और पौड़ी जैसे दुर्गम पर्वतीय जिलों में काम करते हुए प्रशासन को गांवों तक पहुंचाने का काम किया।

राजधानी देहरादून की कमान संभालने वाले डॉ. चौहान की कार्यशैली हमेशा पारंपरिक प्रशासनिक ढांचे से अलग रही है। वे फाइलों और दफ्तरों तक सीमित रहने के बजाय गांवों की पगडंडियों पर चलकर सीधे जनता के बीच पहुंचे, समस्याएं सुनीं और मौके पर समाधान कराने के लिए जाने गए।

बेडू से बनाया रोजगार और स्वरोजगार का मॉडल

पौड़ी गढ़वाल में जिलाधिकारी रहते हुए डॉ. आशीष चौहान ने स्थानीय उत्पादों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में अनूठी पहल की। श्रीनगर रोड स्थित उद्यान विभाग के फल प्रसंस्करण केंद्र में उन्होंने पहाड़ी अंजीर ‘बेडू’ प्रसंस्करण एवं प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ कराया।

इस केंद्र में बेडू से जैम, अचार, चटनी और ड्राई अंजीर जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। योजना का उद्देश्य केवल उत्पाद बनाना नहीं, बल्कि पहाड़ी फलों की न्यूट्रीशन और मेडिसिन वैल्यू को पहचान देकर उनका वैल्यू एडिशन करना है।

एनआरएलएम फेडरेशन से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार इन उत्पादों की मार्केटिंग “हिलांस ब्रांड” के माध्यम से चारधाम यात्रा मार्गों और विभिन्न आउटलेट्स पर की जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।

स्कूलों में शुरू कराया चाइनीज भाषा शिक्षण

डॉ. चौहान ने शिक्षा के क्षेत्र में भी नवाचार की मिसाल पेश की। पौड़ी में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के माध्यम से 10 इंटर कॉलेजों के 100 छात्रों और 10 शिक्षकों के लिए चाइनीज भाषा शिक्षण का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कराया गया।

उनका मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंडारिन भाषा की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है और भविष्य में यह युवाओं के लिए रोजगार और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के नए द्वार खोल सकती है।

22 किलोमीटर पैदल चलकर सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

मैदानी निरीक्षण और जनसंवाद डॉ. आशीष चौहान की कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान माने जाते हैं। पौड़ी में उन्होंने ऋषिकेश-बद्रीनाथ प्राचीन तीर्थाटन पैदल मार्ग पर सीमालू गांव से नांद गांव तक करीब 22 किलोमीटर पैदल ट्रेकिंग की।

इस दौरान उन्होंने सीमालू, महादेव चट्टी, किनसूर, घेड़, बिलोगी और सिंकटाली जैसे गांवों में पहुंचकर स्थानीय लोगों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को समझा।

रात्रि चौपाल से बनाया जनता से सीधा संवाद

डॉ. चौहान उन चुनिंदा अधिकारियों में गिने जाते हैं जो दूरस्थ और दुर्गम गांवों तक पैदल पहुंचने में विश्वास रखते हैं। वे कई बार गांवों में रात्रि प्रवास कर “रात्रि चौपाल” लगाते रहे हैं।

पिथौरागढ़ और पौड़ी जिलों में उन्होंने इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया, जहां ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान कराया गया।

हर्षिल के सेब को दिलाई वैश्विक पहचान

उत्तरकाशी में जिलाधिकारी रहते हुए डॉ. चौहान ने हर्षिल घाटी के प्रसिद्ध सेबों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। उन्होंने “एप्पल फेस्टिवल” की शुरुआत कर स्थानीय सेब उत्पादकों को नई पहचान दिलाई।

इस पहल का असर यह हुआ कि हर्षिल के हजारों सेब किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई और उत्पाद को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

आपदा प्रबंधन में भी लंबा अनुभव

उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे संवेदनशील सीमांत जिलों में कार्य करने के कारण डॉ. आशीष चौहान को आपदा प्रबंधन का व्यापक अनुभव हासिल है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, बादल फटने और आपात परिस्थितियों से निपटने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

स्पेन में मिला अनोखा सम्मान

डॉ. चौहान की लोकप्रियता और कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्पेन के पर्वतारोही एंटोनियो ने उनकी कार्यशैली से प्रभावित होकर स्पेन की एक अनाम पर्वत चोटी का नाम “मजिस्ट्रेट प्वाइंट” और वहां तक पहुंचने वाले ट्रैक का नाम “वाया आशीष” रखा।

उत्तरकाशी में डीएम रहते हुए डॉ. चौहान द्वारा की गई सहायता के सम्मान में उन्हें यह अनूठा अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला।

देहरादून में अब सामने बड़ी चुनौतियां

देहरादून के जिलाधिकारी के रूप में अब उनके सामने स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करना, वनाग्नि नियंत्रण, अतिक्रमण पर कार्रवाई, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी, आपदा प्रबंधन और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।

हालांकि उनके प्रशासनिक अनुभव, जनसरोकारों से जुड़ी कार्यशैली और जमीनी पकड़ को देखते हुए राजधानी देहरादून को नई दिशा मिलने की उम्मीदें भी तेज हो गई हैं।

जोधपुर से देहरादून तक का प्रशासनिक सफर

मूल रूप से राजस्थान के जोधपुर निवासी डॉ. आशीष चौहान वर्ष 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। देहरादून के जिलाधिकारी बनने से पहले वे उत्तरकाशी, पौड़ी और पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के निदेशक के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

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