: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उठाए अग्निपथ, अंकिता हत्याकांड, भर्ती घोटाले और ट्रैफिक दबाव के सवाल
: 12 किमी मानव श्रृंखला में छात्रों, आंगनवाड़ी, आशा और श्रमिकों को दबाव में लाने का आरोप
गणेश गोदियाल
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून दौरे और दिल्ली-देहरादून हाईवे के लोकार्पण के बाद उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों और जनता से जुड़े सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज किया।
गोदियाल ने कहा कि बीते रोज कांग्रेस द्वारा 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगा गया था, जो सीधे उत्तराखंड की जनता और प्रदेश की व्यवस्था से जुड़े सवाल थे, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने इन सवालों को “चिमटे से भी नहीं छुआ”।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की गौरवशाली सैन्य परंपरा का जिक्र तो किया, लेकिन केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना ने सेना में भर्ती का सपना देखने वाले युवाओं की आकांक्षाओं को तोड़ दिया है।
प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य में बढ़ते महिला अपराधों पर चिंता जताते हुए कहा कि उत्तराखंड महिला अपराध के मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों की संलिप्तता के आरोप भी सामने आते रहे हैं।
अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मामले में भाजपा के कई बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगे, मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की घोषणा भी की गई, लेकिन अब तक जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
इसके अलावा भर्ती घोटालों को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए गोदियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर भी कोई टिप्पणी नहीं की।
दिल्ली-देहरादून हाईवे के लोकार्पण पर उन्होंने कहा कि यदि यह परियोजना प्रदेश की “भाग्य रेखा” है तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इससे उत्तराखंड को वास्तविक लाभ क्या मिलेगा। उन्होंने स्थायी राजधानी, लोकायुक्त की नियुक्ति और सख्त भू-कानून जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली से देहरादून की यात्रा 2.5 घंटे में पूरी होने की सुविधा से स्थानीय निवासियों में असमंजस की स्थिति है। बढ़ते यातायात और संभावित दबाव को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से निवासियों व पर्यटकों के लिए स्पष्ट ट्रैफिक एडवाइजरी और ठोस मोबिलिटी प्लान जारी करने की मांग की।
गोदियाल ने कहा कि देहरादून शहर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह हाईवे भविष्य में गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकता है। शहर की आंतरिक सड़कें पर्याप्त चौड़ी नहीं हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत नहीं है और अचानक बढ़ने वाले यातायात दबाव को संभालने की क्षमता भी सीमित है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली और हरियाणा से आने वाले पर्यटकों को मसूरी, ऋषिकेश और हरिद्वार जाने के लिए देहरादून से होकर गुजरना पड़ेगा, जिससे शहर “बॉटलनेक” या “चोक पॉइंट” बन सकता है। ऐसे में राज्य सरकार की तैयारियों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री के रोड शो को लेकर भी गोदियाल ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र-छात्राओं को तपती धूप में घंटों खड़ा कर 12 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई गई। मेडिकल, इंजीनियरिंग संस्थानों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहनों, महिला मंगल दलों और फैक्ट्रियों के श्रमिकों तक को कार्यक्रम में भेजने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मानव श्रृंखला में शामिल अधिकांश लोग स्वतःस्फूर्त नहीं थे, बल्कि दबाव बनाकर लाए गए थे। यह स्थिति प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में गिरावट को दर्शाती है, क्योंकि भाजपा के मंत्री, विधायक, पार्षद, जिला व ब्लॉक अध्यक्ष सहित संगठनात्मक पदाधिकारी भी स्वाभाविक रूप से भीड़ जुटाने में असफल रहे।
गोदियाल ने भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम के कार्यक्रम मंच पर नजर न आने को भी सवालों से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में लगे आरोपों के चलते भाजपा नेतृत्व उनसे दूरी बनाता दिख रहा है।
अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक जिम्मेदार मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाते हुए जनता के मुद्दों को उठाया है। प्रधानमंत्री का नैतिक दायित्व था कि वे इन मुद्दों पर बात करते, लेकिन 2017 से अब तक उत्तराखंड की जनता को केवल सब्जबाग ही दिखाए गए हैं।