120 वर्ष पुरानी गलोगी जलविद्युत परियोजना के संरक्षण पर जोर, नियामक आयोग ने किया निरीक्षण

:- आरएमयू कार्यों की गुणवत्ता पर जताया संतोष, आधुनिक SCADA प्रणाली स्थापित करने के निर्देश

:- टैरिफ संशोधन से मिल सकेगी परियोजना के सुधार एवं धरोहर संरक्षण को गति

देहरादून। उत्तराखंड विद्युत विनियामक आयोग ने सोमवार को 3.5 मेगावाट क्षमता वाली गलोगी लघु जलविद्युत परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर इसके नवीनीकरण, उच्चीकरण एवं पुनरोद्धार (आरएमयू) कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। आयोग ने आरएमयू कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए परियोजना के संरक्षण एवं आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया।

आयोग के अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद, सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी, सदस्य विधि अनुराग शर्मा तथा निदेशक वित्त दीपक पांडेय ने यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परियोजना के विद्युत गृह, हेडवर्क्स, पेनस्टॉक सहित विभिन्न प्रमुख संरचनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान परियोजना के संचालन, तकनीकी व्यवस्थाओं तथा वित्तीय एवं प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

निरीक्षण के दौरान आयोग ने आरएमयू कार्यों पर हुए व्यय के आधार पर टैरिफ संशोधन के लिए यूजेवीएन लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत याचिका का भी संज्ञान लिया। आयोग ने परियोजना से जुड़े संरक्षण और सुरक्षा संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि लगभग 120 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक जलविद्युत परियोजना को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा सके।

परियोजना अधिकारियों ने आयोग को बताया कि गलोगी परियोजना न केवल विद्युत उत्पादन करती है, बल्कि देहरादून शहर को पेयजल आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस पर यूजेवीएन के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने अधिकारियों को विद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति के बेहतर संचालन के लिए आधुनिक एकीकृत एससीएडीए (SCADA) प्रणाली स्थापित करने के निर्देश दिए।

आयोग का यह निरीक्षण परियोजना की वर्तमान तकनीकी स्थिति, आर्थिक व्यवहार्यता और भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं के मूल्यांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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