:- डीआरडीओ वैज्ञानिक से मारपीट, महिलाओं-बुजुर्गों से अभद्रता और लगातार विवादों के बाद प्रशासन सख्त; पुनीत अग्रवाल 6 माह के लिए देहरादून से बाहर
देहरादून, 19 मई। सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में लंबे समय से विवादों और कथित दबंगई को लेकर चर्चित बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर जिला प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड गुण्डा नियंत्रण अधिनियम-1970 की धारा 3(3) के तहत पुनीत अग्रवाल को “गुंडा” घोषित करते हुए 6 माह के लिए जनपद देहरादून से जिला बदर कर दिया है।
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने जनसुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्वतः संज्ञान लेकर यह कार्रवाई की। आदेश के अनुसार आरोपी बिना अनुमति अगले छह माह तक देहरादून जनपद की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर कारावास और जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। थाना रायपुर पुलिस को आरोपी को 24 घंटे के भीतर जनपद से बाहर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की शुरुआत 25 अप्रैल 2026 को एटीएस कॉलोनी निवासी एवं डीआरडीओ वैज्ञानिक हेम शिखा समेत अन्य लोगों की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 13 अप्रैल को पुनीत अग्रवाल ने डीआरडीओ से जुड़े एक वैज्ञानिक के परिवार पर हमला किया। इस दौरान मारपीट में पीड़ित का कान का पर्दा फट गया, जबकि महिलाओं और बुजुर्गों के साथ भी अभद्रता की गई।
जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी मसूरी से गोपनीय जांच कराई। जांच में स्थानीय लोगों ने आरोपी के व्यवहार को भय और असुरक्षा का कारण बताया। थाना रायपुर में दर्ज एफआईआर, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय निवासियों की शिकायतों को भी न्यायालय ने गंभीरता से लिया।
सुनवाई के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं निदेशक मनोज कुमार ढाका ने भी कार्रवाई की मांग की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी की गतिविधियां क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर रही हैं और समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो गंभीर घटना हो सकती है।
हालांकि बचाव पक्ष ने मामले को आपसी रंजिश और सिविल विवाद बताया, लेकिन न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, वायरल वीडियो, दर्ज मुकदमों और जांच रिपोर्ट के आधार पर पुनीत अग्रवाल को अभ्यस्त आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति माना।
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 115(2), 351(2), 352, 74, 126(2), 324(4) और 447 के तहत पांच मुकदमे दर्ज हैं। उस पर डीआरडीओ वैज्ञानिक से मारपीट, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों से अभद्रता, बच्चों को धमकाने, दीपावली पर पिस्टल लहराने, झूठे मुकदमों में फंसाने और अवैध कब्जे जैसे गंभीर आरोप भी हैं।
इससे पहले भी जिला मजिस्ट्रेट ने नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने के मामले में पुनीत अग्रवाल का शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर हथियार जब्त कराया था।
बताया जा रहा है कि एटीएस कॉलोनी में नगर निगम और एमडीडीए की जमीन पर कथित अवैध निर्माण को लेकर विवाद बढ़ा था। विरोध करने पर डीआरडीओ वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा के साथ मारपीट हुई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। स्थानीय निवासियों का आरोप था कि बिल्डर के खिलाफ लगातार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही थी।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है। डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट कहा है कि महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और आमजन की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।