:- रुद्रपुर में हिंदी भाषा महोत्सव एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, नेपाल सहित देश के आठ राज्यों के कवियों ने किया काव्य पाठ
रुद्रपुर। उत्तराखंड भाषा संस्थान तथा बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में नगर निगम सभागार, रुद्रपुर में “हिंदी भाषा महोत्सव एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी” का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “वैश्वीकरण के युग में : हिंदी भाषा और समाज” रहा, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं हिंदी प्रेमियों ने हिंदी भाषा के वर्तमान स्वरूप, वैश्विक विस्तार और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। प्रथम सत्र का उद्घाटन जसविंदर कौर, विवेक बादल बाजपुरी तथा अन्य अतिथियों ने किया। इस अवसर पर बुलंदी की चमोली कार्यकारिणी द्वारा उत्तराखंड के सांस्कृतिक मांगल गीत की आकर्षक प्रस्तुति दी गई।
मुख्य वक्ता डॉ. शशांक शुक्ल ने वैश्वीकरण के दौर में हिंदी की भूमिका, भारतीय भाषाओं के समन्वय और डिजिटल युग में हिंदी की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। आमंत्रित वक्ताओं में डॉ. हेमा जोशी ‘हिमाद्रि’ ने हिंदी के विकास में डिजिटल मीडिया की भूमिका पर व्याख्यान दिया। वहीं प्रो. बीना मथेला ने हिंदी के वैश्विक विस्तार पर अपने विचार रखे तथा डॉ. शशि जोशी ने समकालीन साहित्य के विभिन्न आयामों पर चर्चा की।
राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिंदी भाषा, साहित्य, पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया, लोकभाषाओं तथा वैश्विक हिंदी साहित्य से जुड़े विविध विषयों पर मंथन हुआ। शोधार्थियों ने भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के दौरान ‘चरित्रहीन’, ‘जीवंत हैं हम’, ‘समकालीन कथा साहित्य : कृष्णा सोबती’, ‘अल्फ़ाज़ रहने दो’, ‘तूफान की आहट’, ‘मृत्युलोक की सत्ता’, ‘राम भरोसे’, ‘प्रेयसी’, ‘कृत्रिम बुद्धि का उपयोग’, ‘आध्यात्मिक चेतना एवं प्रकृति के रंग’ तथा ‘छम-छम आया बसंत’ सहित अनेक पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
द्वितीय सत्र में राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें दर्द गढ़वाली, कविता बिष्ट, भव्यता प्रभा सहित नेपाल एवं देश के आठ राज्यों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
आयोजन के दौरान सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, आमंत्रित वक्ताओं, साहित्यकारों, पुस्तक लेखकों, कवियों, शोधार्थियों तथा सहयोगियों का सम्मान किया गया। आयोजन समिति के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगी सदस्यों को भी उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों एवं जनपदों से कवि, साहित्यकार, प्राध्यापक, शोधार्थी, लेखक, हिंदी सेवी, संपादक और मीडिया कर्मी एक मंच पर एकत्र हुए। आयोजकों ने कहा कि उनका उद्देश्य हिंदी भाषा, साहित्य और पठन-पाठन की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना तथा देशभर के साहित्यकारों के बीच संवाद, समन्वय और साहित्यिक सहयोग को मजबूत करना है।
उल्लेखनीय है कि बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति की स्थापना साहित्यकार विवेक बादल बाजपुरी द्वारा की गई थी तथा इसके संरक्षक पंकज प्रकाश हैं। संस्था पिछले वर्षों से हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा इसके माध्यम से देश-विदेश के साहित्यकारों को साझा मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। संस्था अब तक तीन विश्व कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है।