:- 11 साल बाद भी सड़क के इंतजार में हैं पिनाऊं के ग्रामीण
:- पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणाएं भी नहीं बदल पाईं पिनाऊं की तस्वीर
:- खस्ताहाल पैदल रास्ते से ग्रामीणों ने गर्भवती को पहुंचाया सड़क तक, हैली का भी घंटों इंतजार
देवाल/बागेश्वर। सड़क की सुविधा नहीं होने का दर्द पिनाऊं गांव में बुधवार को एक बार फिर सामने आया। प्रसव पीड़ा से परेशान गांव की आंगनबाड़ी कार्यकत्री खिमुली देवी को ग्रामीणों ने छह किलोमीटर तक डंडी के सहारे खतरनाक और क्षतिग्रस्त पैदल रास्ते से सड़क तक पहुंचाया। गांव से पाटिंगधार तक पहुंचने में ग्रामीणों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। पाटिंगधार में शाम साढ़े पांच बजे तक हैली का इंतजार किया गया, लेकिन हैली नहीं पहुंची। इसके बाद ग्रामीण गर्भवती को शाम छह बजे कालीताल सड़क मार्ग तक लेकर पहुंचे। यहां से रात्रि करीब साढ़े नौ बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल पहुंचाया गया। देवाल में डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने पर एंबुलेंस से गर्भवती को जिला अस्पताल बागेश्वर ले जाया गया।
पिनाऊं गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। खास बात यह है कि गांव को सड़क से जोड़ने के लिए वर्ष 2015 में पूर्व विधायक स्व. शेर सिंह दानू के नाम पर 23 किलोमीटर लंबी धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं सड़क स्वीकृत हुई थी। स्वीकृति के करीब 11 साल बाद भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणाओं के बावजूद गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई।
छह किमी का सफर बना जिंदगी की जद्दोजहद
बुधवार सुबह करीब 11 बजे खिमुली देवी को अचानक प्रसव पीड़ा हुई। गांव में सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें डंडी के सहारे पैदल ले जाने का फैसला किया। पिनाऊं से बलाण गांव तक आने वाला पैदल रास्ता भी क्षतिग्रस्त था। ग्रामीणों ने रास्ते को दुरुस्त कर किसी तरह गर्भवती को पाटिंगधार तक पहुंचाया।
ग्राम प्रधान लखपत दानू के अनुसार ग्रामीण गर्भवती को करीब छह किलोमीटर तक डंडी से लेकर आए। पाटिंगधार पहुंचने के बाद शाम साढ़े पांच बजे तक हैली का इंतजार किया गया। हैली नहीं पहुंचने पर ग्रामीण उन्हें शाम छह बजे कालीताल सड़क मार्ग तक लेकर गए। इसके बाद रात करीब साढ़े नौ बजे देवाल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां डॉक्टर नहीं मिलने पर एंबुलेंस से गर्भवती को जिला अस्पताल बागेश्वर भेजा गया।
ग्रामीणों ने मिलकर उठाया जिम्मा
गर्भवती को सड़क तक पहुंचाने के इस मुश्किल सफर में पिनाऊं की आशा कार्यकत्री बिमला देवी के साथ लखपत सिंह, हिम्मत सिंह, लक्ष्मण सिंह, हरूली देवी, कस्तूरा देवी, नंदी देवी, सुरेंद्र सिंह और मोतिमा देवी समेत अन्य ग्रामीण जुटे रहे। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण गांव में बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को आए दिन डंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
2015 में स्वीकृत हुई थी 23 किमी सड़क
ग्राम प्रधान लखपत दानू ने कहा कि दो-दो मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं के बाद भी पिनाऊं तक सड़क नहीं पहुंच सकी है। उन्होंने कहा कि सड़क के अभाव में ग्रामीणों को गंभीर परिस्थितियों में भी पैदल रास्ते और डंडी का सहारा लेना पड़ता है। पिनाऊं गांव स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेजर देव सिंह दानू और पूर्व विधायक स्व. शेर सिंह दानू का गांव भी है।
वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई चल रही : लोनिवि
लोनिवि थराली के ईई मनीष डोगरा ने बताया कि पिनाऊं गांव के लिए स्वीकृत सड़क के मार्ग में काफी संख्या में बांज और बुरांश के पेड़ हैं। सड़क निर्माण के लिए वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने बताया कि धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं के नाम से सड़क स्वीकृत है। लोहाजंग से वांक गांव तक सड़क बन चुकी है। यदि ग्रामीणों की सहमति होती है तो वांक गांव से भी पिनाऊं के लिए सड़क ले जाने की संभावना है।