देहरादून। रक्षाबंधन का त्योहार करीब है और बाजारों में राखियों की मांग बढ़ने लगी है। लेकिन देहरादून के मालदेवता में इस बार राखियों की खास चर्चा है… क्योंकि यहां राखियां तैयार कर रही है सास-बहू की जोड़ी!
मालदेवता की लीला रावत और उनकी बहू अलका रावत ने राखी निर्माण को अपने स्वरोजगार का जरिया बनाया है।
दोनों महिलाएं रायपुर ब्लॉक के आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के नाम से अपना कारोबार चला रही हैं।
पिछले साल दोनों ने करीब 1,200 राखियां तैयार कर 25 हजार रुपये का मुनाफा कमाया था।
अब इस साल लक्ष्य और बड़ा है।
करीब 2 हजार से ज्यादा राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है और लगभग 1,500 राखियां तैयार भी हो चुकी हैं।
खास बात ये है कि इन राखियों की बिक्री सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है। इंस्टाग्राम के जरिए भी ऑर्डर मिल रहे हैं।
ऊन, क्रोशिया, मौली, रिबन और कई तरह की सामग्री से तैयार की जा रही इन राखियों में रुद्राक्ष, महाकाल, नजरबट्टू समेत कई आकर्षक डिजाइन शामिल हैं।
और कहानी सिर्फ मालदेवता की नहीं है…
देहरादून के रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं।
इन महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से देहरादून के प्रमुख मॉलों में स्टॉल लगाए जाएंगे।
वहीं 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जहां राखियों के साथ पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की बिक्री होगी।
यानी इस रक्षाबंधन अगर आप राखी खरीदने जा रहे हैं, तो एक बार इन महिला समूहों की हस्तनिर्मित राखियों पर भी नजर जरूर डालिए।
क्योंकि आपकी एक खरीदारी किसी महिला के हुनर को बाजार और उसके परिवार को आत्मनिर्भरता दे सकती है।
मालदेवता की सास-बहू की यह जोड़ी सिर्फ राखियां नहीं बना रही… बल्कि आत्मनिर्भरता की नई डोर बुन रही है।
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