नकली दवाओं के इंटरनेशनल नेटवर्क पर STF की बड़ी कार्रवाई 24 घंटे में दूसरी रेड, कोटद्वार की अवैध फैक्ट्री सील; कई राज्यों में सप्लाई का खुलासा

देहरादून/कोटद्वार। उत्तराखंड एसटीएफ ने नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन फेक पिल” के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ ने ऑनलाइन नकली दवाएं बेचने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार करने के बाद 24 घंटे के भीतर कोटद्वार स्थित एक अवैध दवा फैक्ट्री को भी सील कर दिया।

जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह ब्रांडेड कंपनियों की जीवन रक्षक दवाओं की हूबहू नकली कॉपी तैयार कर फेसबुक पेज और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में बेच रहा था। गिरोह के सदस्य फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे।

एसटीएफ के अनुसार, “एसके हेल्थ केयर” नामक फेसबुक पेज पर सन फार्मा, मैनकाइंड, ग्लेनमार्क, मैक्लियोड्स, जाइडस समेत कई कंपनियों की नकली दवाएं आधे दाम में बेची जा रही थीं। जांच के दौरान एसटीएफ ने काल्पनिक ग्राहक बनकर दवाएं मंगवाईं, जिसके बाद गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

दो आरोपी गिरफ्तार
एसटीएफ ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है—

जतिन सैनी निवासी संभल, उत्तर प्रदेश

गौरव त्यागी निवासी देहरादून/मेरठ

गौरव त्यागी के खिलाफ हरिद्वार, देहरादून और महाराष्ट्र में पहले से नकली दवाओं से जुड़े तीन मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।

भगवानपुर और कोटद्वार में बनती थीं नकली दवाएं
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि भगवानपुर क्षेत्र में अलग-अलग ब्रांडेड कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। साथ ही कोटद्वार सिडकुल क्षेत्र की बंद फैक्ट्री का भी इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर उत्पादन के लिए किया जाता था।

कोटद्वार फैक्ट्री सील
एसटीएफ, ड्रग विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कोटद्वार स्थित मैसर्स नैक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स फैक्ट्री में छापा मारा। जांच में पाया गया कि फैक्ट्री का लाइसेंस वर्ष 2024 में निरस्त हो चुका था, इसके बावजूद परिसर में दवा निर्माण से जुड़े उपकरण और मशीनें मौजूद थीं।

टीम ने मौके से लगभग 3 किलोग्राम कम्प्रेस्ड टैबलेट और 34 पंच उपकरण बरामद किए। प्रथम दृष्टया मामला औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के उल्लंघन का पाया गया, जिसके बाद फैक्ट्री को सील कर दिया गया।

एसटीएफ के मुताबिक, इसी फैक्ट्री पर वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के आरोप भी लगे थे। वहीं, वर्ष 2024 में तेलंगाना पुलिस ने भी यहां छापेमारी कर नकली दवाओं का जखीरा बरामद किया था।

कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
आरोपियों के खिलाफ बीएनएस, एनडीपीएस एक्ट, आईटी एक्ट और कॉपीराइट एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

जनता से अपील
एसटीएफ ने लोगों से अपील की है कि—

बिना बिल के दवा न खरीदें

अत्यधिक छूट के लालच में नकली दवा लेने से बचें

केवल लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें

किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या नकली दवा कारोबार की सूचना तुरंत एसटीएफ या ड्रग विभाग को दें

सूचना के लिए एसटीएफ हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं—
0135-2656202, 9412029536
(सूचनाकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा)

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हाइलाइट्स:-

:- फेसबुक पेज से चल रहा था नकली दवाओं का नेटवर्क

:- आधे दाम में बेची जा रही थीं ब्रांडेड दवाएं

:- कोरियर से कई राज्यों में भेजी जा रही थीं नकली दवाएं

:- 2021 में नकली रेमडेसिविर मामले से भी जुड़ा फैक्ट्री कनेक्शन

:- लाइसेंस रद्द होने के बाद भी चल रहा था उत्पादन

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