स्वास्थ्य मंत्री के औचक निरीक्षण पर सियासत तेज

:- हरिद्वार से मंगलौर तक सरकारी अस्पतालों की बदहाली पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

:- कांग्रेस विधायक ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठाए सवाल

:- मंगलौर अस्पताल प्रकरण को लेकर फिर गरमाई राजनीति

देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर सियासत गरमा गई है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के हरिद्वार स्थित चैनराय जिला महिला चिकित्सालय के औचक निरीक्षण के बाद कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने स्वास्थ्य विभाग और सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने हरिद्वार दौरे के दौरान चैनराय जिला महिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिलने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। मंत्री ने अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली तथा समयबद्ध उपचार, दवाइयों की उपलब्धता और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने साफ कहा कि राज्य के सरकारी और गैरसरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेशवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी बीच मंगलौर से कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने मंत्री के निरीक्षण का वीडियो साझा करते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि चार दिन पहले जब उन्होंने मंगलौर के सरकारी अस्पताल का निरीक्षण किया था, तब स्वास्थ्य विभाग ने उनके दौरे को “पूर्व नियोजित” बताया था। अब मंत्री स्वयं अस्पतालों की अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जता रहे हैं। विधायक ने सवाल उठाया कि क्या स्वास्थ्य विभाग मंत्री के निरीक्षण को भी पूर्व नियोजित बताएगा?

काजी निजामुद्दीन ने अपने पूर्व निरीक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि मंगलौर सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक गंभीर मरीज घंटों अस्पताल के बाहर तड़पता रहा, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ ने उसकी सुध नहीं ली। मरीज की पत्नी से बातचीत के बाद वे स्वयं मरीज को अपनी गाड़ी से रुड़की के निजी अस्पताल लेकर गए। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल का स्ट्रेचर तक धूल से सना हुआ था, जो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण और कांग्रेस विधायक के आरोपों के बाद राज्य में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बनता जा रहा है।

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