“गांव-गांव फुटबॉल, जमीनी लीग और ईमानदार सिस्टम से ही सुधरेगा भारतीय फुटबॉल” : डॉ रावत

:- पूर्व नेशनल खिलाड़ी, रेफरी और इंटरनेशनल कोच डॉ. विरेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से की अपील, एआईएफएफ में सुधार और जमीनी ढांचे को मजबूत करने पर दिया जोर

ओम प्रकाश जोशी, देहरादून। भारतीय फुटबॉल की लगातार गिरती स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए पूर्व नेशनल खिलाड़ी, रेफरी, इंटरनेशनल कोच, राज्य आंदोलनकारी और समाजसेवी डॉ. विरेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम एक निवेदन पत्र भेजकर देश में फुटबॉल के व्यापक सुधार की मांग उठाई है।

डॉ. रावत ने अपने पत्र में कहा कि भारतीय फुटबॉल का पतन हाल के वर्षों की नहीं, बल्कि पिछले करीब पांच दशकों की समस्या है। उन्होंने कहा कि All India Football Federation के विभिन्न अध्यक्षों के कार्यकाल में लगातार गिरावट देखी गई, लेकिन खेल की असली बीमारी को पहचानने और दूर करने की गंभीर कोशिश नहीं हुई।

उन्होंने वर्तमान एआईएफएफ अध्यक्ष Kalyan Chaubey से अपेक्षा जताई कि एक पूर्व खिलाड़ी होने के नाते वे राजनीति से ऊपर उठकर खेल की जमीनी हकीकत को समझें और ठोस सुधार लागू करें।

डॉ. रावत ने कहा कि 150 करोड़ की आबादी वाले देश की फीफा रैंकिंग 142 होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पुरुष टीम लगातार पिछड़ रही है, वहीं महिला टीम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ पाई है। ऐसे में ओलंपिक और विश्व कप खेलने का सपना लगातार दूर होता जा रहा है।

उन्होंने अपने 27 वर्षों के कोचिंग और रेफरी अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि फुटबॉल को सुधारने के लिए सिर्फ आईएसएल और आई-लीग पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि गांव, स्कूल और छोटे आयु वर्ग से शुरुआत करनी होगी।

डॉ. रावत के प्रमुख सुझाव

स्कूल और छोटे आयु वर्ग के खिलाड़ियों पर गंभीर फोकस

उम्र में धोखाधड़ी पर सख्त रोक

All India Football Federation और राज्य इकाइयों में भ्रष्टाचार खत्म किया जाए

संतोष ट्रॉफी के महत्व को पुनर्स्थापित किया जाए

सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग पर कठोर कार्रवाई

पूर्व खिलाड़ियों और कोचों को सम्मानपूर्वक जिम्मेदारी दी जाए

हर राज्य में वार्षिक लीग प्रतियोगिताएं अनिवार्य हों

गांव-गांव फुटबॉल, छोटे मैदान और गरीब कोचों को आर्थिक सहायता

ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की ठोस नीति

डॉ. रावत ने कहा कि यदि इन सुझावों पर गंभीरता से अमल किया जाए तो भारतीय फुटबॉल फिर से सम्मानजनक स्थिति में लौट सकता है।

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