देहरादून से निकलकर सीमांत तक पहुंची धामी कैबिनेट

:- बनबसा में पहली बार कैबिनेट बैठक, दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में भी अब मंत्रिमंडल की बैठकें; 1.19 लाख विद्यार्थियों के कौशल विकास को पांच साल में ₹200 करोड़, जमीन के पट्टेदारों को भूमिधरी अधिकार और स्थानीय निकायों को वित्तीय मजबूती समेत कई बड़े फैसले

चम्पावत/ देहरादून। उत्तराखंड में अब कैबिनेट बैठकें सिर्फ देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर रविवार को भारत-नेपाल सीमा से सटे बनबसा में पहली बार राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई। सरकार ने साफ संकेत दिया कि आगे दूरस्थ और सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों में भी कैबिनेट बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि स्थानीय समस्याओं और विकास की जरूरतों पर मौके से निर्णय लिए जा सकें। बनबसा बैठक में लिए गए फैसलों में सबसे ज्यादा असर भूमि अधिकार, युवाओं की रोजगार क्षमता, स्थानीय निकायों की वित्तीय व्यवस्था, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों पर पड़ने वाला है।

देहरादून-केंद्रित शासन व्यवस्था से बाहर निकलकर सरकार को प्रदेश के अंतिम छोर तक ले जाने की दिशा में धामी सरकार ने नई शुरुआत की है। चम्पावत के बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों को शासन की प्राथमिकताओं के केंद्र में लाने का राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कैबिनेट बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे स्थानीय परिस्थितियों, जन अपेक्षाओं और विकास की संभावनाओं को सीधे शासन के सामने रखा जा सकेगा।

बैठक में उच्च शिक्षा के करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों के लिए मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को मंजूरी दी गई। योजना पर पांच वर्षों में करीब ₹200 करोड़ खर्च होंगे। वहीं वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों/कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने तथा लालकुआं और जौनसार-बावर में भूमि के विनियमितीकरण संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली।

राज्य के वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ। सरकार ने 2026-27 से 2030-31 तक कुल संचयी ऋण की अधिकतम सीमा जीएसडीपी के 30 प्रतिशत और वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा तीन प्रतिशत निर्धारित करने को मंजूरी दी है।

कैबिनेट के बड़े फैसले :-

:- 1.19 लाख विद्यार्थियों को कौशल योजना: मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को मंजूरी। पांच साल में करीब ₹200 करोड़ खर्च होंगे।

:- पट्टेदारों को भूमिधरी अधिकार: वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों/कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने का फैसला।

:- लालकुआं और जौनसार-बावर में राहत: संबंधित भूमि के विनियमितीकरण की अवधि और प्रक्रिया में महत्वपूर्ण निर्णय।

:- राजकोषीय अनुशासन: वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा जीएसडीपी का 3% और 2026-27 से 2030-31 तक संचयी ऋण की अधिकतम सीमा 30%।

:- स्थानीय निकायों को वित्तीय आधार: छठवें राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में रखने को मंजूरी।

:- पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार: ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विस्तार से जुड़ी ₹66.29 करोड़ की अवशेष धनराशि जारी करने की मंजूरी।

:- रजिस्ट्री में PAN सत्यापन: संपत्ति की खरीद-बिक्री में PAN Verification व्यवस्था लागू होगी।

:- मेडिकल कॉलेजों में वेतन/मानदेय पुनर्निर्धारण: सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और डेमोंस्ट्रेटर के देय वेतन/मानदेय में संशोधन।

:- समूह ‘ग’ में साक्षात्कार व्यवस्था में बदलाव: उप कारापाल के पद पर शारीरिक दक्षता व लिखित परीक्षा के चलते साक्षात्कार खत्म किया जाएगा।

:- सिंचाई व्यवस्था में नया कानून: 1873 के पुराने उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम को निरस्त कर नया उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक लाने को मंजूरी।

:- कुक्कुट आहार सब्सिडी अब DBT से: सब्सिडी आधार-सीडेड/लिंक्ड बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी।

:- वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा नियमावली: भर्ती और सेवा शर्तों को नियमित करने के लिए नई नियमावली को मंजूरी।

बनबसा-टनकपुर के लिए चार बड़ी घोषणाएं :-

:- श्रेणी-1 ‘ख’ और तराई-भाभर स्टेट के पट्टों की भूमि के पट्टेदारों के विनियमितीकरण की कार्यवाही जल्द।

:- शारदा और कैनाल कॉरिडोर के तहत बनबसा-टनकपुर के प्राचीन मंदिरों का सौंदर्यीकरण व विस्तार।

:- एपीजे अब्दुल कलाम राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, टनकपुर के विस्तार के लिए 2.01 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

:- बनबसा-टनकपुर में सरकारी भूमि पर कच्चे और अस्थायी मकानों में रह रहे परिवारों को प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत पक्के आवास।

‘फर्रा/छन्तोली’ से लोक संस्कृति का सम्मान

कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों को चम्पावत की देवीधुरा की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा से जुड़ी फर्रा/छन्तोली भेंट की गई। बांस या रिंगाल की खपच्चियों से बनी यह पारंपरिक ढाल सीमांत क्षेत्र की लोक संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है।

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