:- कांग्रेस ने मुकदमे को बताया राजनीतिक द्वेष से प्रेरित, डीजीपी से मिलकर एफआईआर वापस लेने की मांग; भाजपा बोली- अनुष्ठान का जातिगत कोण नहीं
हल्द्वानी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी में रामलीला मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को लेकर दिए गए बयान के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मुकदमा जवाहर नगर, हल्द्वानी निवासी अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ से जुड़े बताए गए हैं और स्वयं को अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित बताते हैं।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने एससी/एसटी अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा में मामला दर्ज किया है। शिकायत में राहुल गांधी के 29 अगस्त को दिल्ली में दिए गए बयान को आधार बनाया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, 8 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा की थी। इसके बाद 11 अगस्त को कुछ लोगों द्वारा मैदान में हवन-यज्ञ कर गंगाजल का छिड़काव करते हुए कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया गया था।
29 अगस्त को दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने इस घटना का जिक्र करते हुए कथित तौर पर इसे ‘छुआछूत’ और ‘दलित विरोधी मानसिकता’ का प्रतीक बताया था। उन्होंने ऐसे कृत्य के लिए एससी-एसटी कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी की थी।
शिकायतकर्ता का आरोप
शिकायतकर्ता अमित कुमार और संस्था से जुड़े अन्य सदस्यों का कहना है कि वे स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। उनका दावा है कि कांग्रेस की रैली के बाद मैदान में गंदगी और आपत्तिजनक नारेबाजी हुई थी, जिसके बाद स्वच्छता और धार्मिक मर्यादा के उद्देश्य से अनुष्ठान किया गया। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने इस धार्मिक आयोजन को जातिगत रंग देकर उनके समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई।
कांग्रेस ने एफआईआर पर जताया विरोध
एफआईआर के बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित और झूठा मुकदमा बताया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने डीजीपी से मुलाकात कर मुकदमा वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पुलिस को पहले उन लोगों की भूमिका की जांच करनी चाहिए थी, जिन्होंने खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान का ‘शुद्धिकरण’ किया। पार्टी का आरोप है कि राहुल गांधी के खिलाफ 24 घंटे के भीतर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जबकि शुद्धिकरण की घटना का वीडियो सामने होने के बावजूद संबंधित लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताते हुए कहा कि कांग्रेस ऐसे मुकदमों से डरने वाली नहीं है और मामले को कानूनी व लोकतांत्रिक तरीके से लड़ा जाएगा।
भाजपा ने कहा- जातिगत रंग देना गलत
वहीं भाजपा का कहना है कि रामलीला मैदान में किया गया अनुष्ठान किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं था। भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी पर धार्मिक आयोजन को राजनीतिक और जातिगत मुद्दा बनाकर समाज में विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया है।
अब जांच पर टिकी निगाहें
एक ही घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। शिकायतकर्ता जहां इसे अपनी धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को आहत करने वाला बयान बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे शुद्धिकरण की घटना पर सवाल उठाने के बाद दर्ज किया गया राजनीतिक मुकदमा बता रही है। ऐसे में अब पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं। नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने मुकदमे की पुष्टि की है। साथ ही कहा कि मामले की जांच की जा रही है।