उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में 7वें राष्ट्रीय समाज कार्य सप्ताह के तहत ऑनलाइन सेमिनार आयोजित, 103 से अधिक समाज कार्य शिक्षार्थियों ने किया प्रतिभाग
हल्द्वानी, 21 अगस्त 2026। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग की ओर से 7वें राष्ट्रीय समाज कार्य सप्ताह के अवसर पर “सशक्त मन, सशक्त परिवार” थीम पर ऑनलाइन सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों, अंतरपीढ़ीगत जुड़ाव तथा बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती कुशा सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया। समाज कार्य विभाग की समन्वयक डॉ. नीरजा सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया।
भारत में व्यावसायिक समाज कार्यकर्ताओं के राष्ट्रीय संघ (एनएपीएसडब्ल्यूआई) के प्रोफेसर अनूप कुमार भारतीय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की मजबूती की शुरुआत परिवार से ही होती है। उन्होंने कहा कि सरकार और विभिन्न संस्थाएं इस दिशा में प्रयास कर रही हैं, लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य का विषय और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि समाज एक संक्रमणकाल से गुजर रहा है और ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कठिन होती जीवन परिस्थितियों को अधिक मानवीय, संतुलित और बेहतर कैसे बनाया जाए।
परिवार में संवाद, विश्वास और सहयोग जरूरी
कार्यक्रम में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रोफेसर प्रतिभा जे. मिश्रा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। उनका परिचय उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पूजा हेड़िया ने कराया।
प्रोफेसर प्रतिभा जे. मिश्रा ने कहा कि बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर परिवार के निर्माण की दिशा में यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि परिवार में संवाद, विश्वास और सहयोग का माहौल विकसित कर कई मानसिक समस्याओं को शुरुआती स्तर पर सुलझाया जा सकता है। उन्होंने 3C—जुड़ाव, संवाद और रचनात्मक दृष्टिकोण तथा सकारात्मक जीवनशैली पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए सकारात्मक लोगों के साथ रहने और उनसे जुड़ने, भोजन पर ध्यान देने, आवश्यकता होने पर औषधि के प्रति लापरवाही न बरतने, अपनी मानसिक स्थिति की नियमित निगरानी करने तथा सजगता और ध्यान के माध्यम से योग, ध्यान एवं रुचि आधारित गतिविधियों को जीवन में शामिल करने पर जोर दिया।
अंतरपीढ़ीगत संबंधों में भावनात्मक जुड़ाव जरूरी
द्वितीय वक्ता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. तूलिका भट्टाचार्य ने अंतरपीढ़ीगत संबंधों और बुजुर्गों की देखभाल पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दूर रहकर भी परिवार भावनात्मक रूप से जुड़े रह सकते हैं। बुजुर्गों की देखभाल केवल युवाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि बुजुर्ग भी परिवार और युवा पीढ़ी को विभिन्न प्रकार का सहयोग प्रदान करते हैं। यह संबंध दोतरफा होता है।
डॉ. भट्टाचार्य ने कहा कि अंतरपीढ़ीगत संबंध मूलतः पारस्परिक होते हैं, हालांकि दोनों पक्षों का योगदान हमेशा समान नहीं होता। उन्होंने स्मृतिलोप यानी डिमेंशिया के संदर्भ में अंतरपीढ़ीगत जुड़ाव को समझने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति के साथ जुड़ाव केवल बातचीत या स्मृतियों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सम्मान, धैर्य, भावनात्मक उपस्थिति और साझा गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न पीढ़ियों का जुड़ाव बनाए रखना जरूरी है।
स्वस्थ समाज की आधारशिला है स्वस्थ परिवार
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने समाज कार्य विभाग की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज का निर्माण व्यक्ति और परिवार से ही संभव है।
कार्यक्रम में राज्यभर से 103 से अधिक समाज कार्य के शिक्षार्थियों ने सहभागिता की। सेमिनार में यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि सशक्त मन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सशक्त परिवार की आधारशिला है और सशक्त परिवार ही स्वस्थ, संवेदनशील एवं सुदृढ़ समाज का निर्माण कर सकता है।
कार्यक्रम के सफल संचालन में निदेशक समाज विज्ञान विद्याशाखा प्रोफेसर रेणु प्रकाश, डॉ. शुभंकर शुक्ल एवं डॉ. आरुषि हिंवाली शुक्ल सहित अन्य ने योगदान दिया। समाज विज्ञान विद्याशाखा की निदेशक प्रोफेसर रेणु प्रकाश ने समाज कार्य विभाग की समन्वयक डॉ. नीरजा सिंह सहित समस्त आयोजक शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं।