:- देहरादून में 2 एजेंट हिरासत में, 2200 संदिग्ध खातों की जांच जारी; 12 टीमें कर रहीं सत्यापन अभियान
मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून, 16 अप्रैल। उत्तराखंड एसटीएफ ने ऑपरेशन प्रहार के तहत साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे म्यूल बैंक खातों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य में संचालित 15 म्यूल खातों पर कानूनी कार्रवाई की है, जबकि 80 से अधिक खातों का सत्यापन किया जा चुका है। STF की रडार पर इस समय लगभग 2200 संदिग्ध म्यूल बैंक खाते हैं, जिनकी पहचान, बैंक रिकॉर्ड जांच और मोबाइल नंबर विश्लेषण का अभियान जारी है।
एसटीएफ द्वारा गठित 12 विशेष टीमें साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने में जुटी हैं। डिजिटल साक्ष्यों, बैंक अभिलेखों और तकनीकी जांच के आधार पर जिन 15 खातों की जांच की गई, उनमें कई खाते साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने, ट्रांसफर करने और छिपाने में उपयोग किए जा रहे थे।
सबसे बड़े मामले में एक बैंक खाते से जुड़े ₹1.53 करोड़ की साइबर ठगी से संबंधित 28 शिकायतें National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) और I4C पोर्टल पर दर्ज मिलीं। अन्य खातों में भी लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन और कई शिकायतें सामने आई हैं।
दो प्रमुख एजेंट हिरासत में, देहरादून में मुकदमा दर्ज :-
इस मामले में साइबर पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा अपराध संख्या 26/2026 के तहत धारा 318(4), 61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा धारा 66(D) IT Act में अभियोग दर्ज किया गया है।
जांच के दौरान सामने आया कि एक गिरोह भोले-भाले लोगों को कमीशन, किराया, नौकरी और अन्य लालच देकर उनके बैंक खाते खरीदता था, फिर उन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने में करता था।
अब तक गैंग के दो प्रमुख सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
हिरासत में लिए गए आरोपी :-
दानिश अंसारी (29 वर्ष) — मूल निवासी देवबंद, उत्तर प्रदेश, वर्तमान निवासी कंडोली, देहरादून
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने आमजन से अपील की है कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड या नेट बैंकिंग किसी भी अनजान व्यक्ति को कभी न दें।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी घर बैठे कमाई, कमीशन, टिकट बुकिंग, पैसे दोगुना करने, फ्रैंचाइजी और फर्जी कस्टमर केयर नंबर के नाम पर लोगों को फंसा रहे हैं। किसी भी तरह के लालच में आकर बैंक खाते किराए पर देना कानूनी अपराध है।
संदेह की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।