आपदा के समय भरोसे की सबसे बड़ी ताकत है प्रभावी संवाद: विमल डबराल

:- नेशनल पीआर डे कॉन्क्लेव में बोले UJVNL के जनसंपर्क अधिकारी

 :- संकट में त्वरित और पारदर्शी सूचना को बताया जनविश्वास की कुंजी

ओम प्रकाश जोशी, देहरादून। नेशनल पीआर डे कॉन्क्लेव 2026 के अंतर्गत आयोजित विशेष सत्र में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के जनसंपर्क अधिकारी विमल डबराल ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में आपदा प्रबंधन के दौरान प्रभावी जनसंपर्क और त्वरित संवाद ही जनविश्वास बनाए रखने का सबसे मजबूत माध्यम है।

“Powering Public Trust: Crisis Communication and Reputation Management in the Energy Sector” विषय पर आयोजित इस सत्र में विमल डबराल ने ऊर्जा क्षेत्र में संकट की स्थितियों के प्रमुख कारणों—बाढ़, भूस्खलन, अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं, तकनीकी विफलताएं, मानवीय त्रुटियां और समय पर सूचना का अभाव—पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि संकट के समय यदि तथ्यात्मक, पारदर्शी और समयबद्ध सूचना जनता तक नहीं पहुंचती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे समय में मीडिया समन्वय, नियमित प्रेस ब्रीफिंग और सोशल मीडिया की सतत निगरानी बेहद आवश्यक हो जाती है।

विमल डबराल ने कहा कि फेक न्यूज़, मिसकम्युनिकेशन, कमजोर संवाद व्यवस्था और नकारात्मक वर्ड-ऑफ-माउथ पब्लिसिटी आपदा प्रबंधन की बड़ी चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए प्रमाणिक जानकारी का त्वरित प्रसार, नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस और सकारात्मक मीडिया समन्वय सबसे प्रभावी उपाय हैं।

उन्होंने अन्य क्षेत्रों की आपदाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि संवेदनशील संवाद, पारदर्शिता और योजनाबद्ध संचार रणनीति से ही संकट की घड़ी में जनविश्वास को कायम रखा जा सकता है। सुयोग्य नेतृत्व और समय पर संवाद किसी भी आपदा प्रबंधन की सफलता की आधारशिला होते हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि परियोजना क्षेत्रों में अतिक्रमण, पर्यावरणीय मुद्दे और जनाक्रोश जैसी जटिल चुनौतियों के समाधान में भी जनसंपर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्थानीय समुदाय के साथ निरंतर संवाद, जागरूकता अभियान और सहभागिता आधारित दृष्टिकोण से सकारात्मक समाधान संभव है।

सत्र के दौरान विद्यार्थियों को ऊर्जा समेत सरकारी और कॉर्पोरेट क्षेत्र में जनसंपर्क के व्यापक अवसरों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

इस अवसर पर तुलाज इंस्टीट्यूट, देहरादून के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से सहायक प्रोफेसर नीरज कोटियाल और डॉ. दीपिका रावत ने भी अपने विचार रखे। आयोजन में श्रुति कोटियाल, पूजा रूपेन, प्रतीक थपलियाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और जनसंपर्क क्षेत्र से जुड़े पेशेवर मौजूद रहे।

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