लैंड फ्रॉड पर गढ़वाल कमिश्नर सख्त, 51 मामलों का निस्तारण, 5 में एफआईआर के निर्देश

: एक ही खसरे की जमीन दो लोगों को बेचने का खेल उजागर, 170 में से 77 मामलों की सुनवाई पूरी

: मुख्यमंत्री धामी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रशासन एक्शन मोड में, एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब और 15 दिन में फिर होगी समीक्षा

ओम प्रकाश जोशी, देहरादून, 06 अप्रैल 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर प्रशासन ने शिकंजा और कस दिया है। सोमवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में 11 लंबित और 51 नई शिकायतों समेत कुल मामलों की सुनवाई की गई। बैठक में 51 प्रकरणों का निस्तारण किया गया, जबकि 05 मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।

आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जिन मामलों में संयुक्त निरीक्षण अपेक्षित है, उन्हें इसी सप्ताह पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। तहसील स्तर से प्राप्त रिपोर्टों की गहन जांच पर भी जोर दिया गया और भविष्य में किसी भी त्रुटि या विवाद के लिए संबंधित अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी गई।

सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा हटाने के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कराने और पुलिस से प्रभावी जांच सुनिश्चित करने को कहा गया। आयुक्त ने भूमि धोखाधड़ी के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने और स्पष्ट मामलों में एसआईटी जांच के निर्देश भी दिए।

बैठक में एसडीएम सदर और एसडीएम ऋषिकेश की अनुपस्थिति पर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। वहीं एक प्रकरण में तहसीलदार द्वारा आवश्यक जानकारी प्रस्तुत न करने पर आयुक्त ने तत्काल ऋषिकेश रवाना कर एक घंटे के भीतर संपूर्ण विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले मामले भी सामने आए। एक मामले में राजस्थान निवासी व्यक्तियों द्वारा रुद्रप्रयाग में आवासीय उद्देश्य से खरीदी गई भूमि पर होटल निर्माण कर उसे आगे बेचने और बाद में ऋषिकेश में भी भूमि क्रय-विक्रय करने का मामला सामने आया। विधिक परीक्षण में धारा-154 के उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित भूमि को सरकार में निहित करने तथा धारा 166 व 167 के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

इसी तरह कुछ मामलों में एक ही खसरे की भूमि दो अलग-अलग व्यक्तियों को बेचने और दूसरी जगह की भूमि पर कब्जा दिलाने जैसे गंभीर फर्जीवाड़े उजागर हुए। इन सभी मामलों में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कुछ शिकायतें जांच में निराधार मिलने पर ड्रॉप भी की गईं।

लैंड फ्रॉड के कुल 170 मामलों में से अब तक 77 मामलों की सुनवाई की जा चुकी है, जिनमें 51 का निस्तारण किया गया है। शेष मामलों में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की गई है। आयुक्त ने कहा कि अगले 15 दिनों में फिर बैठक कर बाकी मामलों की समीक्षा की जाएगी, ताकि वादियों को त्वरित न्याय मिल सके।

बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान, एसपी (ग्रामीण) जया बलूनी, डीजीसी नितिन वशिष्ट समेत संबंधित तहसीलों के वरिष्ठ अधिकारी और तहसीलदार मौजूद रहे।

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