संगठन ने कहा— नई अनुबंध शर्तें न्यायालयों की भावना के विपरीत, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा अधिकारों की भी उठाई मांग
मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून। उपनल के माध्यम से कार्यरत संविदा कर्मचारियों से जुड़े 02 अप्रैल 2026 को जारी शासनादेश के खिलाफ उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन (इंटक) ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। संगठन का कहना है कि “समान कार्य के लिए समान वेतन” सुनिश्चित करने के नाम पर तय की गई नई अनुबंध शर्तें माननीय उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की भावना के विपरीत हैं।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि न्यायालयों द्वारा समान कार्य-समान वेतन के साथ-साथ नियमितीकरण को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन शासन के कुछ अधिकारी इन आदेशों की अनदेखी करते हुए न्यायालय की अवमानना की स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित अनुबंध की शर्तें श्रम कानूनों, ईएसआई अधिनियम, ईपीएफ अधिनियम और बोनस अधिनियम का खुला उल्लंघन करती हैं। संगठन के अनुसार यह व्यवस्था संविदा कर्मचारियों को बंधुआ मजदूरी और बेगारी जैसी परिस्थितियों की ओर धकेलने वाली है, जिससे कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के अपने अधिकारों से वंचित हो सकते हैं।
संगठन ने मांग की है कि 02/04/2026 को जारी शासनादेश को तत्काल निरस्त किया जाए और राज्य के विभिन्न विभागों में उपनल के माध्यम से कार्यरत सभी संविदा कर्मचारियों को सरल एवं न्यायसंगत अनुबंध व्यवस्था के तहत “समान कार्य के लिए समान वेतन” दिया जाए।
इसके साथ ही संगठन ने यह भी मांग उठाई कि जिन उपनल कर्मचारियों ने 10 वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण कर ली है, उन्हें विनियमितीकरण नियमावली-2025 के तहत नियमित किया जाए।
मीडिया के माध्यम से संगठन ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि न्यायालयों के आदेशों का सम्मान करते हुए कर्मचारी विरोधी अनुबंध शर्तों को वापस लिया जाए। साथ ही, ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की मांग की गई है, जिन पर जानबूझकर न्यायालय के आदेशों की अवमानना और सरकार की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया गया है।
संगठन ने साफ किया कि इस मामले में शीघ्र ही विधिक परामर्श लिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर सड़क पर आंदोलन भी किया जाएगा।
— विनोद कवि
प्रदेश अध्यक्ष
उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन (इंटक)

प्रदेश अध्यक्ष,
उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन (इंटक)