रायपुर थाने की हवालात में बंद युवा कल्याण विभाग के प्रधान सहायक की मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

­ :- हिरासत में लेने के कुछ घंटे बाद मौत, पोस्टमार्टम में मौत का कारण बताया जा रहा फांसी, अब मजिस्ट्रेट जांच पर टिकी नजरें

युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग के प्रधान सहायक सुनील रतूड़ी। फाइल फोटो

देहरादून, 31 मार्च। रायपुर थाने की हवालात में बंद युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग के प्रधान सहायक की मौत ने पुलिस की कार्य कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधान सहायक सुनील रतूड़ी (45 वर्ष) को शराब के नशे में पेट्रोल पंप पर हुए मामूली विवाद के आरोप में 28 मार्च की शाम को रायपुर थाना पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, लेकिन पुलिस की माने तो कुछ ही देर बाद वह थाने की हवालात में बेहोश मिला और अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिंग (फांसी) बताया गया है, लेकिन यह बात परिजनों और अन्य लोगों के गले नहीं उतर रही है।

सुलगते सवाल, जवाबदेही किसकी :-

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस निगरानी में बंद एक व्यक्ति हवालात के भीतर फांसी कैसे लगा लेता है ? आखिर सुरक्षा और निगरानी के क्या इंतजाम थे और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी उस दौरान क्या कर रहे थे? जो व्यक्ति अपनी कॉलोनी के पास एक पंप पर कार में महज फ्यूल भराने जा रहा है तो वो कुछ ही घंटे में आत्महत्या क्यों करेगा। क्या पेट्रोल पंप पर खड़ी कार के साथ पुलिस किसी व्यक्ति को ड्रंक एंड ड्राइव के आरोप में गिरफ्तार कर सकती है। हो सकता है कार वहां चलाकर कोई अन्य लाया हो? माना कि आपने ड्रंक एंड ड्राइव में किसी आरोपी को गिरफ्तार कर भी लिया है तो आप उसके परिजनों को तो सूचना दोगे। किसी को गिरफ्तार करने के दौरान उसका मेडिकल जरूर कराया जाता है तो क्या पुलिस ने आरोपी का मेडिकल कराया ? क्या एल्कोमीटर शराब पिए होने का अंतिम प्रमाण है। पुलिस कर्मियों का कहना है कि कंबल फाड़ कर फांसी लगाई गई तो शाम के समय हवालात में कंबल किसने और क्यों रखा गया ? कंबल आसानी से फटता नहीं है तो उससे भला फांसी कैसे लगाई वो भी वह व्यक्ति फांसी कैसे लगा सकता है जिसका सांस परीक्षण में 231.6 mg/100 ml अल्कोहल आता है। फांसी लगा भी ली तो थाने में मौजूद पुलिस कर्मी क्या कर रहे थे। क्या किसी को हवालात में डालने के बाद कोई निगरानी नहीं की जाती है। क्या थाने का हवालात इतना दूर है जो वहां किसी की नजर नहीं पड़ी। क्या किसी ने उन्हें इतना टॉर्चर किया कि वह इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर हो गया। थाने से महज 200 मीटर की दूरी पर युवा कल्याण विभाग की आवासीय कॉलोनी है। जहां प्रधान सहायक परिवार सहित रहता था तो क्या कोई पुलिस कर्मी वहां तक जाकर उसके परिवार को सूचना नहीं दे सकता है। मान लिया है कि उसने शराब पी थी, लेकिन वह कोई पेशेवर अपराधी नहीं है और न ही उसने किसी के साथ मारपीट की थी जो उसके साथ ऐसा बर्ताव किया गया। इतनी लापरवाही बरती गई।

पेट्रोल पंप से थाने तक, फिर मौत :

पुलिस के अनुसार, 28 मार्च को लाडपुर स्थित महादेव फ्यूल पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भराने के बाद भुगतान को लेकर विवाद हुआ। पुलिस का आरोप है कि सुनील रतूड़ी शराब के नशे में कर्मचारियों से अभद्रता कर रहा था। मौके पर पहुंची पुलिस उसे वाहन सहित थाने ले आई।

सांस परीक्षण में 231.6 mg/100 ml अल्कोहल मिलने पर पुलिस ने उसे धारा 185/207 एमवी एक्ट में गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि थाने में भी वह हंगामा करता रहा, जिसके बाद उसे हवालात में बंद किया गया।

हवालात के भीतर मौत ने बढ़ाई शंका :-

कुछ देर बाद निगरानी के दौरान पुलिसकर्मी ने सुनील रतूड़ी को हवालात में बेहोश पाया। इसके बाद पुलिस उन्हें कोरोनेशन अस्पताल ले गई, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

अब सवाल यह है कि हवालात जैसी हाई सिक्योरिटी जगह में बंद आरोपी ने कथित तौर पर फांसी कैसे लगाई? क्या हवालात में ऐसी कोई वस्तु मौजूद थी जिससे यह संभव हो सका? क्या पुलिस ने बंदी की तलाशी और सुरक्षा मानकों का सही पालन किया?

परिजनों की आशंका, विसरा सुरक्षित :

मामले को लेकर परिजनों की ओर से भी आशंका जताई गई है। इसी के चलते पुलिस ने पोस्टमार्टम के बावजूद मृतक का विसरा सुरक्षित कर फॉरेंसिक साइंस लैब भेजने की बात कही है।

पूरे मामले की ज्यूडिशियल इंक्वायरी मजिस्ट्रेट द्वारा कराई जा रही है, जबकि पोस्टमार्टम विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल से वीडियोग्राफी के बीच कराया गया है।

जांच रिपोर्ट से खुलेंगे कई राज :-

यह मामला अब केवल एक मौत का नहीं, बल्कि पुलिस हिरासत की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही का बन गया है। मजिस्ट्रेट जांच और एफएसएल रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह वास्तव में आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है। जब प्रदेश की राजधानी के बीच एक थाने की हवालात में सुरक्षा व्यवस्था इस प्रकार है जहां कोई सरकारी कर्मचारी की मौत हो जाती है तो आप अन्य जगहों की स्थिति का सहज अंदाजा लगा सकते हैं। प्रथमदृश्य महज 4 पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर करना और एक को अनुशासनहीनता में संस्पेंड करना क्या काफी है ? हंसता खेलता परिवार : युवा कल्याण विभाग के प्रधान सहायक के दो बच्चे हैं बेटा करीब 12 से 13 साल का है तो बेटी अभी करीब 9 से 10 साल की है। पत्नी दून मेडिकल कॉलेज में लैब टेक्निशियन के पद पर कार्यरत है। खुद सुनील रतूड़ी को नौकरी करते हुए 15 साल से अधिक हो गए हैं। ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि हंसता खेलता परिवार है। किसी चीज की कमी नहीं है तो भला कोई क्यों आत्महत्या का कदम उठाएगा। ऐसे में थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका पर संदेह खड़ा हो रहा है। हालांकि, देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने मामले की जांच एसपी देहात जय बलोनी को सौंपी है। साथ ही परिजनों को निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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