“4 साल बेमिसाल नहीं, 4 साल बेहाल — कांग्रेस ने धामी सरकार पर साधा निशाना”

:- बजट, बेरोजगारी, पलायन और भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल, कहा—‘डेटा बोल रहा है, नैरेटिव नहीं’

मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून। धामी सरकार के “4 साल बेमिसाल” के दावों के जवाब में उत्तराखंड कांग्रेस ने मंगलवार को प्रेस वार्ता कर सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित इस संयुक्त प्रेस वार्ता को उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सचिव एवं मंगलौर से विधायक काजी निजामुद्दीन ने संबोधित किया।

प्रीतम सिंह ने कहा कि राज्य में “4 साल बेमिसाल” नहीं बल्कि “4 साल बेहाल” रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट का आकार बढ़ने के बावजूद राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, महंगाई चरम पर है और केंद्र पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य को ₹28,000 करोड़ मिले, जबकि 16वें वित्त आयोग ने सहायता देने से इनकार कर दिया है। साथ ही जीएसटी प्रतिपूर्ति बंद होने से राज्य के आय स्रोत प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने दावा किया कि मातृशक्ति कुपोषण दर 56% तक पहुंच गई है। सरकार द्वारा 30,000 रोजगार देने के दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सेवा नियोजन कार्यालयों में 10 लाख से अधिक बेरोजगार पंजीकृत हैं। कृषि क्षेत्र में ग्रोथ रेट -4% होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं हुआ। यूरिया के बैग का वजन 50 किलो से घटाकर 40 किलो किए जाने और कीमतों में वृद्धि का भी मुद्दा उठाया गया। डीजल और बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर भी सरकार को घेरा गया।

प्रीतम सिंह ने कहा कि पलायन आयोग निष्क्रिय हो चुका है, 1726 गांव निर्जन हो गए हैं और लगभग 1700 विद्यालय बंद हो चुके हैं। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देहरादून ही स्मार्ट नहीं बन पाया, तो नए शहरों के लिए संसाधन कहां से आएंगे। नमामि गंगे परियोजना में ₹26,500 करोड़ खर्च के बावजूद ताजा कैग रिपोर्ट में भ्रष्टाचार उजागर होने का आरोप भी लगाया गया।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को “रेफर सेंटर” बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है, आपदा प्रबंधन विफल है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं है। साथ ही खनन, आबकारी और भूमाफियाओं को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।

वहीं काजी निजामुद्दीन ने कहा कि राज्य का बजट अब पारंपरिक आर्थिक दस्तावेज न रहकर “नैरेटिव-ड्रिवन प्रेजेंटेशन” बन गया है, जबकि वास्तविक स्थिति फाइनेंस अकाउंट्स में सामने आती है। उन्होंने कहा कि बजट अनुमान (BE) और वास्तविक व्यय (Actual) के बीच बड़ा अंतर बजट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।

उन्होंने कहा कि राज्य में राजस्व व्यय अधिक और पूंजीगत व्यय सीमित है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार खर्च तो कर रही है, लेकिन निवेश नहीं कर रही। राज्य की राजस्व स्वायत्तता कमजोर हो रही है और केंद्र पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, जबकि उधारी और ब्याज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है।

काजी निजामुद्दीन ने योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार underspending और savings सामने आ रही हैं, जिससे स्पष्ट है कि सरकार घोषणाएं तो कर रही है, लेकिन उन्हें जमीन पर लागू करने में विफल है। उन्होंने कहा, “डेटा बोल रहा है, नैरेटिव नहीं”, और सरकार से फाइनेंस अकाउंट्स के आधार पर जवाब देने की मांग की।

प्रेस वार्ता में परिवहन विभाग का मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि 400 से अधिक बसें मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, जबकि 68,000 बसों को परमिट तो मिला है लेकिन उनके पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं है।

अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड को प्रचार नहीं, बल्कि जवाबदेह, पारदर्शी और विश्वसनीय राजकोषीय शासन की आवश्यकता है।

इस अवसर पर मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी, देहरादून महानगर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लालचंद शर्मा, महामंत्री नवीन जोशी, शोभाराम और प्रतिमा सिंह सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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