सकारात्मक सोच और जागरूकता से ही संभव है मानसिक स्वास्थ्य सुधार : ललित जोशी
मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून: सतत विकास और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए ‘सजग इंडिया’ ने यूकॉस्ट एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखंड के सहयोग से सीआईएमएस कॉलेज में “सतत विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य: एक सशक्त भविष्य के लिए” विषय पर प्री-कॉन्क्लेव पैनल चर्चा का आयोजन किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य अब हाशिये का विषय नहीं, बल्कि एक सशक्त और लचीले समाज की आधारशिला है।
राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखंड के सहायक निदेशक डॉ. पंकज कुमार ने युवाओं में तेजी से बढ़ रहे डिप्रेशन, एंग्जायटी, तनाव और आत्मसम्मान की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा और साथियों के दबाव के चलते नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसे समय रहते सही मार्गदर्शन से रोका जा सकता है।
उन्होंने शैक्षणिक दबाव को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण बताते हुए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच पारदर्शी संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को खत्म करने, सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता बढ़ाने और टेली-मानस हेल्पलाइन (14416) के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।
यूकॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश नौटियाल ने कहा कि संचार की कमी, धैर्य की कमी और अभ्यास का अभाव मानसिक समस्याओं को बढ़ाते हैं। उन्होंने युवाओं को चुनौतियों से भागने के बजाय उनका सामना करने और निरंतर प्रयास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
काउंसलर मनोवैज्ञानिक डॉ. दीप्ति ध्यानी ने मानसिक स्वास्थ्य और सतत विकास के संबंध को समझाते हुए व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए। उन्होंने 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक और 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक को एंग्जायटी और ओवरथिंकिंग को नियंत्रित करने के प्रभावी उपाय बताया।
लाइव डेमो के जरिए उन्होंने प्रतिभागियों को वर्तमान क्षण में लौटने का अभ्यास कराया—पांच चीजें देखना, चार आवाजें सुनना, तीन चीजों को स्पर्श करना, दो गंध पहचानना और एक स्वाद पर ध्यान केंद्रित करना। इससे तनाव कम करने और मन को स्थिर रखने में मदद मिलती है।
सजग के संस्थापक एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सदस्य ललित जोशी ने कहा कि सामाजिक वातावरण व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करता है। उन्होंने सकारात्मक संगति और सही दृष्टिकोण को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि “जब आप अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं, तो परिणाम दो ही होते हैं—या तो सफलता मिलती है या नया अनुभव।”
कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है। आयोजकों ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे मानसिक स्वास्थ्य को मुख्यधारा में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस अवसर पर कॉलेज के प्रबंध निदेशक संजय जोशी, प्रिंसिपल डॉ. चेतना, डॉ. मेघा पंत, डॉ. अदिति पांडेय, शेखर शर्मा, डॉ. प्रियंका गुसाईं, डॉ. अंजना गुसाईं, पंकज सजवान, खुशी सहित लगभग 300 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।