सीएम के सख्त निर्देश पर बड़ा फैसला: देहरादून जिले के 76 जर्जर स्कूल भवन ध्वस्त होंगे

बच्चों की जान से खिलवाड़ नहीं:
डीएम की सख्ती से 10 दिन में आई 100 स्कूलों की रिपोर्ट, ₹1 करोड़ स्वीकृत

देहरादून डीएम सविन बंसल

मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून, (18 जनवरी 2026):
माननीय मुख्यमंत्री के स्पष्ट और सख्त निर्देशों के अनुपालन में जिले में वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़े विद्यालय भवनों को लेकर जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने दो टूक कहा कि नौनिहालों के जीवन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

76 स्कूल भवन बने बच्चों के लिए खतरा
जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जनपद में कुल 79 विद्यालय भवन पूर्ण रूप से निष्प्रोज्य पाए गए हैं, जिनमें 13 माध्यमिक और 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें से 76 जर्जर स्कूल भवनों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया एक झटके में शुरू की जा रही है।

डीएम की सख्ती, 10 दिन में आई रिपोर्ट
जर्जर भवनों की रिपोर्ट में हो रही देरी पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया, जिसके बाद महज 10 दिनों के भीतर 100 विद्यालयों के जर्जर भवनों की विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को प्राप्त हुई। शिक्षा विभाग द्वारा सूची पूर्ण विवरण सहित सौंपी गई।

₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत
जिलाधिकारी के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को पूर्ण एवं आंशिक निष्प्रोज्य भवनों के आंगणन (एस्टिमेट) तैयार करने के आदेश दिए गए थे। इसके तहत ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, ताकि ध्वस्तीकरण और सुरक्षा कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

वैकल्पिक पढ़ाई की व्यवस्था पहले
रिपोर्ट के अनुसार 63 विद्यालयों में वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित कर दी गई है। शेष 16 विद्यालयों में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं 17 विद्यालय आंशिक रूप से निष्प्रोज्य घोषित किए गए हैं, जहाँ सुरक्षा मानकों के अनुसार मरम्मत अथवा प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जाएंगे। 8 विद्यालयों में ध्वस्तीकरण की आवश्यकता नहीं पाई गई।

सविन बंसल, जिलाधिकारी देहरादून

बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जो भवन पूरी तरह निष्प्रोज्य हैं, उनका तत्काल ध्वस्तीकरण किया जाएगा। जहाँ वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, वहाँ पहले बच्चों की पढ़ाई की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा है और पूरी कार्रवाई समयबद्ध, पारदर्शी व जवाबदेह तरीके से की जाएगी।

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