रिवर्स माइग्रेशन को झटका : दिल्ली में नौकरी छोड़ गांव के पास होमस्टे शुरू किया, लेकिन नहीं मिला पानी का कनेक्शन

पेयजल कनेक्शन के लिए ढाई साल से भटक रहा होमस्टे संचालक

आवेदन, शपथपत्र और शिकायत के बाद भी नहीं मिला पानी

मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून। उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। ताजा मामला पौड़ी गढ़वाल जिले के जयहरीखाल ब्लॉक के ग्राम पाली तल्ली का है, जहां एक होमस्टे संचालक पिछले ढाई साल से पेयजल कनेक्शन के लिए संघर्ष कर रहा है।

 सूर्या बड़थ्वाल दिल्ली में राष्ट्रीय न्यूज चैनलों में पत्रकार के रूप में कार्यरत थे। सरकार की होमस्टे योजना से प्रेरित होकर वह अपने गांव लौटे और स्वरोजगार के तहत होमस्टे शुरू किया, लेकिन उन्हें अब तक पेयजल कनेक्शन नहीं मिल पाया है।

चार आवेदन, दो शपथपत्र—फिर भी नहीं मिला कनेक्शन:-

सूर्या बड़थ्वाल के अनुसार, सितंबर 2023 से अब तक चार बार विधिवत आवेदन और दो शपथपत्र देने के बावजूद उन्हें पेयजल कनेक्शन नहीं मिला। उन्होंने भैरवगढ़ी पेयजल योजना के तहत ‘हर घर नल जल योजना’ में कनेक्शन की मांग की थी।

उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों से कई बार संपर्क करने और लिखित अनुरोध देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

शिकायत के बाद थमाया गया 92,784 रुपये का बिल :-

पीड़ित के मुताबिक, 25 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद 19 फरवरी 2026 को उन्हें 92,784 रुपये का बिल थमा दिया गया। बताया गया कि इस राशि के बिना कनेक्शन नहीं दिया जाएगा।

सूर्या का कहना है कि यह शुल्क असामान्य रूप से अधिक है और बिना उचित जांच के जारी किया गया है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पर्यटन विभाग से मिली मदद, पेयजल समस्या बनी बाधा :

सूर्या ने बताया कि उत्तराखंड पर्यटन विभाग से उन्हें होमस्टे स्थापित करने में सहयोग मिला और वे स्वरोजगार को आगे बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन पानी की मूलभूत सुविधा न होने से उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।

 जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भेजे पत्र :-

पीड़ित ने अपनी समस्या को लेकर सांसद, विधायक, विधानसभा अध्यक्ष, पेयजल सचिव और जिलाधिकारी सहित कई अधिकारियों को पत्र भेजे हैं, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हो पाया है।

सूर्या का कहना है कि उनके द्वारा जमा की गई पटवारी रिपोर्ट (2023) और ग्राम प्रधान प्रमाण पत्र (2024) से स्पष्ट है कि वे लंबे समय से उसी भवन में रह रहे हैं। इसके बावजूद उनके आवेदन को लेकर विरोधाभासी जानकारी दी गई।

 रिवर्स माइग्रेशन पर उठ रहे सवाल :-

यह मामला राज्य में रिवर्स माइग्रेशन की नीति पर भी सवाल खड़े करता है। गांव लौटकर स्वरोजगार शुरू करने वाले युवाओं को यदि मूलभूत सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, तो पलायन रोकने के प्रयासों पर असर पड़ना तय है। वहीं, इस मामले में जल निगम के अधिशासी अभियंता अजय बेलवाल का कहना है कि कनेक्शन देने के लिए उन्होंने इंकार नहीं किया है। जहां से उन्हें कनेक्शन दिया जाना है वहां से करीब 300 मीटर की पाइप लाइन पड़नी है। आवेदनकर्ता को मैटीरियल अपना लाना होगा। इसके बाद हम विभागीय शुल्क के अनुसार कनेक्शन कर देंगें।

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