फूलदेई 2026 (षष्टम दिवस): संस्कृति संरक्षण का संदेश, बाल फुल्यारों ने सजाईं देहरियां

काशी विश्वनाथ गुरुकुलम के बच्चों ने निभाई परंपरा, अपर जिला अधिकारी मुक्ता मिश्र ने दिया शिक्षा और संस्कार का संदेश

मोनाल एक्सप्रेस, उत्तरकाशी। चैत्र संक्रांति से आरंभ हुए लोकपर्व फूलदेई के षष्टम दिवस पर परंपरा, आस्था और संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत श्री काशी विश्वनाथ गुरुकुलम के विद्यार्थियों द्वारा भगवान काशी विश्वनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई।

इसके पश्चात बाल फुल्यार उत्तरकाशी स्थित माँ उज्वला देवी (महिषासुर मर्दिनी) मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने परंपरानुसार फ्योंली सहित स्थानीय पुष्पों को घरों की देहरियों में अर्पित कर सुख-समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना की।

बाबा काशी विश्वनाथ की प्रेरणा और महंत अजय पुरी के मार्गदर्शन में बीते 10 वर्षों से यह सांस्कृतिक पहल निरंतर जारी है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही है।

इस दौरान बाल सेवकों ने अपर जिला अधिकारी श्रीमती मुक्ता मिश्र के आवास पर पहुंचकर भी पुष्प अर्पित किए।

कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते हुए अपर जिला अधिकारी मुक्ता मिश्र ने कहा कि शिक्षा जीवन का सबसे मजबूत आधार है, लेकिन इसके साथ ही अपनी संस्कृति और परंपराओं का पालन भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ाव ही हमें संस्कारवान और सशक्त बनाता है।

इस अवसर पर अनन्या बिष्ट, वैष्णवी रावत, आस्था रावत, दिव्यांशी कुड़ियाल, सत्यम राणा, आरुष डंगवाल, कृष्णा रावत, अंकित, अर्पित, सिया नौटियाल, दिया नौटियाल, रानी उनियाल, वंशिका राणा, नंदिनी, पायल, आयुष राणा, सौरव बिष्ट, सुजल रावत, सानिया, मनदीप रावत, पारस कोटनाला, सुरेंद्र गंगाड़ी सहित अनेक बाल फुल्यार उपस्थित रहे।

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