डाकपत्थर महाविद्यालय में राष्ट्रीय कार्यशाला, शोध और नवाचार में IPR की भूमिका पर मंथन

ओम प्रकाश जोशी, देहरादून (09 अप्रैल)। वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डाकपत्थर में “वैज्ञानिक अनुसंधान एवं तकनीकी प्रगति में बौद्धिक संपदा अधिकार” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय के बौद्धिक संपदा प्रकोष्ठ एवं रसायन विज्ञान विभाग द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) गोविंद सिंह राजवार, कुलपति, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, देहरादून तथा मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. (डॉ.) बीना जोशी, विभागाध्यक्ष, रसायन विज्ञान विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल उपस्थित रहीं।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डी. एस. नेगी के संरक्षण में आयोजित इस कार्यशाला की रूपरेखा संयोजक डॉ. ए. एम. पैन्यूली एवं डॉ. रोहित वर्मा ने प्रस्तुत की और अतिथियों का स्वागत किया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) की जानकारी वैज्ञानिक शोध, नवाचार और तकनीकी उन्नति के लिए अत्यंत आवश्यक है। शोध कार्यों, आविष्कारों और मौलिक विचारों की सुरक्षा के लिए इसकी समझ विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएँ अकादमिक जगत में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ शोध संस्कृति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

तकनीकी सत्रों में विषय विशेषज्ञों ने बौद्धिक संपदा अधिकार, शोध संरक्षण, नवाचार और वैज्ञानिक उपलब्धियों के विधिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. दीपक भट्ट, डॉ. कमल कुमार बिष्ट तथा डॉ. आशीष रतूड़ी ने भी अपने विचार रखे और विषय के विभिन्न आयामों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

तकनीकी सत्रों में डॉ. अरविंद कुमार अवस्थी एवं डॉ. रोशन लाल केष्टवाल ने सत्राध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजकुमारी भंडारी चौहान एवं डॉ. आराधना भंडारी ने गरिमामय ढंग से किया।

प्रो. अरविंद पैन्यूली

इस अवसर पर श्री भगवती प्रसाद कोठियाल, श्री अजय मोहन, अनमोल पैन्यूली, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. राधेश्याम गंगवार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। कार्यशाला में प्राध्यापकगण, शोधार्थियों, छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।

महाविद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और स्मरणीय आयोजन बताया।

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