जिला प्रशासन की निगरानी से बदली स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
₹142.91 लाख से अत्याधुनिक ब्लड बैंक निर्माण युद्धस्तर पर
एसएनसीयू में सुविधाएं दोगुनी, 491 से अधिक नवजातों को मिला जीवनदायी उपचार
देहरादून, 03 जनवरी 2026। जिला प्रशासन देहरादून के सतत प्रयासों से जनपद की स्वास्थ्य सेवाएं तेज़ी से सुदृढ़ हो रही हैं। मा0 मुख्यमंत्री के स्पष्ट मार्गदर्शन एवं जिलाधिकारी सविन बंसल की सतत निगरानी के परिणामस्वरूप जिला चिकित्सालय कोरोनेशन में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। खासतौर पर मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।
ब्लड बैंक का सपना होगा साकार
जिला चिकित्सालय कोरोनेशन में ₹142.91 लाख की लागत से अत्याधुनिक ब्लड बैंक का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। यह परियोजना जिलाधिकारी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रही है। शासन स्तर पर निरंतर समन्वय एवं नियमित मॉनिटरिंग के चलते इसी वित्तीय वर्ष में जिला अस्पताल को अपना ब्लड बैंक मिल जाएगा।
ब्लड बैंक के शुरू होने से मरीजों और तीमारदारों को रक्त की व्यवस्था के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित उपचार सुनिश्चित हो सकेगा।
मातृत्व व शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती
जिले में मातृत्व एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं। 12 नवंबर 2024 को 6 बेड से शुरू की गई स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) अब दोगुनी क्षमता के साथ संचालित हो रही है।
₹17.03 लाख की लागत से विस्तारित एसएनसीयू में दो मदर वार्ड, स्टाफ रूम तथा 24×7 सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई है, जिससे सुरक्षा और देखभाल व्यवस्था और अधिक मजबूत हुई है।
491 से अधिक नवजातों को मिला जीवनदायी उपचार
एसएनसीयू की शुरुआत से अब तक इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रारंभिक चरण में 51 नवजातों को उपचार मिला, जबकि जनवरी 2025 से अब तक 440 से अधिक नवजातों का सफल उपचार किया जा चुका है।
नवजातों के त्वरित परिवहन एवं उच्च स्तरीय जांच के लिए जिलाधिकारी द्वारा एक डेडिकेटेड वाहन की व्यवस्था भी की गई है। जरूरत पड़ने पर नवजातों को ईको जांच के लिए कोरोनेशन अस्पताल भेजा गया, जिससे समय पर विशेषज्ञ उपचार संभव हो सका।
अन्य सुविधाएं भी अंतिम चरण में
ब्लड बैंक के साथ-साथ जिला चिकित्सालय में ऑटोमेटेड पार्किंग और आधुनिक कैंटीन का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है। मरीजों और तीमारदारों की सुविधा के लिए “रक्त गरुड़” नामक एक विशेष इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराया गया है, जिससे रक्त लाने-ले जाने की प्रक्रिया और सुगम हुई है।