रुद्रप्रयाग के तीन निरीक्षण भवनों को निजी हाथों में देने की आशंका जताई, कांग्रेस ने आंदोलन का ऐलान किया

:- जिला कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व विधायक ने कहा- केदार घाटी की महत्वपूर्ण सरकारी संपत्तियों को निजी क्षेत्र में देने से पहले सरकार स्थिति स्पष्ट करे

मनोज रावत, पूर्व विधायक केदारनाथ एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता

रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग जिले के दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी स्थित लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को निजी हाथों में दिए जाने की आशंका जताते हुए कांग्रेस ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप कंडारी और केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कि इन संपत्तियों का क्षेत्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों पर होना इन्हें विशेष महत्व देता है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से सरकारी जमीनों और संपत्तियों को लंबी अवधि के लिए निजी क्षेत्र को दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि रुद्रप्रयाग के तीनों निरीक्षण भवन ऐसे स्थानों पर स्थित हैं, जहां भूमि की उपलब्धता सीमित है। ऐसे में इन संपत्तियों के भविष्य को लेकर सरकार को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

मनोज रावत, पूर्व विधायक केदारनाथ

कांग्रेस नेताओं ने नैनीताल के पटवाडांगर में प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश के पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के संबंध में जारी निविदाओं का भी उल्लेख किया। यूआईआईडीबी की वेबसाइट पर इन तीनों परियोजनाओं से संबंधित निविदाएं दर्ज हैं। इनमें पटवाडांगर में प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट के लिए भूमि आवंटन तथा अलकनंदा होटल और ऋषिकेश पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पुनर्विकास के लिए पीपीपी मॉडल की निविदाएं शामिल हैं।

सरकारी संपत्तियों के उपयोग पर पारदर्शिता की मांग

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि राज्य सरकार ने बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि और संपत्तियों को यूआईआईडीबी के माध्यम से निजी क्षेत्र में देने की प्रक्रिया शुरू की है। उनका कहना था कि लंबे समय की लीज अथवा पीपीपी व्यवस्था में सरकारी संपत्तियों के उपयोग, शर्तों और सार्वजनिक हित को लेकर पूरी पारदर्शिता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने लोक निर्माण विभाग के कई निरीक्षण भवनों और पर्यटन विभाग की कुछ संपत्तियों को भी निजी क्षेत्र में देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। कांग्रेस ने मांग की कि ऐसी सभी संपत्तियों की सूची, लीज की अवधि, वित्तीय शर्तें और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।

पूर्व में दिए गए भूमि आवंटन का भी उठाया मुद्दा

कांग्रेस नेताओं ने मसूरी के हाथीपांव स्थित पार्क एस्टेट की भूमि को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि को निजी क्षेत्र में लंबी अवधि के लिए देने से पहले उसके बाजार मूल्य, लीज की शर्तों और उससे होने वाले सार्वजनिक लाभ की स्पष्ट जानकारी सामने रखी जानी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने राज्य की भूमि नीति और भू-कानून में हुए बदलावों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकारी और निजी भूमि से जुड़े नीतिगत निर्णयों का असर राज्य के दीर्घकालिक हितों पर पड़ता है, इसलिए इन पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श होना चाहिए।

संपत्तियों को बचाने के लिए आंदोलन की घोषणा

कांग्रेस ने कहा कि रुद्रप्रयाग जिले में पार्टी कार्यकर्ता दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी के निरीक्षण भवनों पर रक्षा सूत्र बांधकर इन्हें निजी हाथों में दिए जाने के विरोध में आंदोलन शुरू करेंगे। पार्टी ने कहा कि राज्यभर में सरकारी जमीनों और संपत्तियों से जुड़े मामलों को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप कंडारी, केदारनाथ के पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज रावत, प्रवक्ता नरेंद्र बिष्ट, नगर पालिका अगस्त्यमुनि अध्यक्ष राजेंद्र गोस्वामी, प्रदेश महामंत्री दीपा देवी आर्य, प्रदेश सचिव कुंवर सजवाण, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हरीश गुसाईं, महावीर चौधरी, विनोद राणा, बलदेव नेगी, कार्यालय प्रभारी मनोहर रावत, अंकुर रौथाण, देवेश्वरी देवी, पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष राय सिंह बिष्ट, नगर अध्यक्ष सुरेंद्र लाल, जिला महामंत्री भारत भूषण कठैत, जिला महामंत्री विजयपाल राणा और संजय चौधरी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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