:- श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में पहली बार बिना सर्जरी उपचार
:- कूल्ड आरएफए तकनीक से बुजुर्ग मरीज को मिली बड़ी राहत
देहरादून, 24 अप्रैल। देहरादून में दर्द प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में पहली बार कूल्ड रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफए) तकनीक के माध्यम से घुटनों के गंभीर दर्द का सफल उपचार किया गया है। इस आधुनिक प्रक्रिया से बिना सर्जरी मरीज को लंबे समय तक राहत मिल रही है।
64 वर्षीय सावित्री देवी, जो लंबे समय से ग्रेड-4 ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित थीं, अत्यधिक दर्द के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हो गई थीं। दवाइयों और पारंपरिक उपचारों से राहत न मिलने पर डॉक्टरों ने कूल्ड आरएफए तकनीक अपनाई। इस प्रक्रिया में विशेष सुई के जरिए घुटनों की दर्द उत्पन्न करने वाली जेनिक्यूलर नसों को नियंत्रित किया जाता है, जिससे दर्द के संकेत मस्तिष्क तक कम पहुंचते हैं।
प्रक्रिया के बाद मरीज को दर्द से काफी राहत मिली और अब वे पहले से बेहतर तरीके से चल-फिर पा रही हैं। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न तो सर्जरी की जरूरत होती है और न ही बड़ा चीरा लगाया जाता है। मरीज को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। कम खर्च, सीजीएचएस कैशलेस सुविधा और तेज रिकवरी के कारण यह तकनीक बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों के लिए बेहद कारगर साबित हो रही है।
डॉ. गिरीश कुमार सिंह ने बताया कि उनका उद्देश्य मरीजों को बिना बड़ी सर्जरी के सुरक्षित और प्रभावी इलाज देना है। उन्होंने कहा कि कूल्ड आरएफए तकनीक घुटनों के पुराने दर्द के उपचार में गेम-चेंजर साबित हो रही है।
इस सफल प्रक्रिया को डॉ. गिरीश कुमार सिंह के नेतृत्व में पेन मेडिसिन टीम ने अंजाम दिया, जिसमें डॉ. आदित्य सेमवाल, प्रणय हटवाल, नर्सिंग स्टाफ और तकनीशियनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक यह सुविधा केवल देश के बड़े महानगरों तक सीमित थी, लेकिन देहरादून में इसकी शुरुआत से उत्तराखंड के मरीजों को अपने ही शहर में अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध हो सकेगा।