: – वन अधिकार, जेल सुधार और कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने पर हुई गहन चर्चा
ओम प्रकाश जोशी, देहरादून, 11 अप्रैल। माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के तत्वावधान में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा आयोजित नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “Enhancing Access to Justice” रखी गई है, जबकि मुख्य विषय “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” है। सम्मेलन का उद्देश्य समाज के कमजोर, वंचित और संवेदनशील वर्गों तक न्याय की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।
सम्मेलन में उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के माननीय न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी, एन. कोटेश्वर सिंह और संदीप मेहता की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल के माननीय मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता भी विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार तिवारी, उत्तराखंड लीगल सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा समेत उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायमूर्तिगण भी शामिल हुए।
जिलों से पहुंचे न्यायिक अधिकारी
सम्मेलन में राज्य के सभी जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव और न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की। विभिन्न सत्रों के माध्यम से न्याय तक पहुंच को और अधिक मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वन समुदायों के अधिकारों पर विशेष सत्र
पहले प्रमुख सत्र में वन समुदायों के अधिकार और वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान वन गुज्जर समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता करते हुए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
जेल सुधार और बंदियों के अधिकारों पर मंथन
दूसरे सत्र में जेल सुधार (Prison Reforms) को केंद्र में रखते हुए बंदियों के अधिकार, न्याय तक उनकी पहुंच और सुधारात्मक उपायों पर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। विशेषज्ञों ने सुधारात्मक न्याय व्यवस्था को और अधिक मानवीय बनाने पर जोर दिया।
यह सम्मेलन न्याय व्यवस्था को समावेशी, सुलभ और मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुंच और मजबूत होगी।