आध्यात्मिकता और नेतृत्व के संगम से फ़िक्की FLO उत्तराखंड ने नए सत्र की शुरुआत की

:- होटल गॉडविन में “सेक्रेड फ्लो” कार्यक्रम आयोजित, स्वामी अवधेशानंद गिरी के प्रेरक विचारों से महिला नेतृत्व को मिली नई दिशा

ओम प्रकाश जोशी, देहरादून। फ़िक्की FLO उत्तराखंड चैप्टर ने शनिवार को होटल गॉडविन में “सेक्रेड फ्लो : एन आफ्टरनून ऑफ ग्रेस एंड ग्रोथ” कार्यक्रम के साथ अपने 2026–27 सत्र की गरिमामयी शुरुआत की। नई चेयरपर्सन तृप्ति बेहल के नेतृत्व में आयोजित यह पहली आधिकारिक सभा रही, जिसमें सदस्यों को आध्यात्मिकता, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व का समृद्ध अनुभव मिला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज रहे। उन्होंने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि जब भी दुनिया ने संकट और असंतुलन का सामना किया है, तब नारी शक्ति ने ही संतुलन स्थापित किया है। उन्होंने महिलाओं को समाज, अर्थव्यवस्था और आध्यात्मिक नेतृत्व की परिवर्तनकारी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि महिलाएं नेतृत्व में आध्यात्मिक दृष्टि को अपनाएं, तो मानवता के लिए नए युग का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

उन्होंने शासन, उद्यमिता, विज्ञान और आध्यात्मिकता में महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए धैर्य, दूरदर्शिता और समग्र सोच को स्थायी बदलाव की आधारशिला बताया।

नई चेयरपर्सन तृप्ति बेहल ने अपने कार्यकाल का विजन “पीपल, पर्पस और प्लैनेट” पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष FLO उत्तराखंड का मार्गदर्शक मंत्र “स्ट्रेंथ विदिन, स्केल बियॉन्ड” रहेगा, जिसके माध्यम से राज्यभर में महिला नेतृत्व आधारित प्रगति को नई गति दी जाएगी।

तृप्ति बेहल एक बहुआयामी रचनात्मक पेशेवर और सामाजिक उद्यमी हैं। वह फैशन डिजाइनर, कलाकार और प्रमाणित आर्ट थेरेपिस्ट होने के साथ ‘आर्ट इन फैक्ट’, ‘बॉन बुशे’ की संस्थापक तथा ‘उद्गम फाउंडेशन’ के माध्यम से वंचित महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए कार्यरत हैं।

इस अवसर पर FLO उत्तराखंड की पूर्व चेयरपर्सन्स किरन भट्ट टोडारिया, कोमल बत्रा, नेहा शर्मा और डॉ. गीता खन्ना ने अपने अनुभव साझा करते हुए संगठन की कार्यशैली, प्रभाव और महिला नेटवर्किंग की ताकत पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में वर्ष 2026–27 की कार्यकारिणी समिति और वर्किंग टीम का परिचय भी कराया गया। इसमें वर्षभर की योजनाओं, प्रमुख पहलों और वार्षिक कैलेंडर की झलक प्रस्तुत की गई। समापन हरिद्वार में दिव्य गंगा आरती के साथ आध्यात्मिक और भावनात्मक वातावरण में हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *