:- पहाड़ की आत्मा की गूंज बनी अन्नपूर्णा बिष्ट की आवाज। 19 साल की पुलिस सेवा के साथ संगीत की साधना, 30 से अधिक एल्बम और तीन दर्जन मंचों पर बिखेरी गायकी की मिठास
मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून। उत्तराखंड पुलिस की खाकी वर्दी जहां अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और जिम्मेदारी का प्रतीक मानी जाती है, वहीं इसी वर्दी में एक ऐसी मधुर आवाज भी बसती है जिसने अपने सुरों से पूरे उत्तराखंड को मंत्रमुग्ध कर दिया है। यह आवाज है उत्तराखंड पुलिस की कर्मठ महिला कर्मी अन्नपूर्णा बिष्ट की, जिनकी कोयल सी मधुर गायकी आज पहाड़ से लेकर मैदान तक लोगों के दिलों में खास जगह बना चुकी है।
साल 2007 में उत्तराखंड पुलिस में भर्ती हुई अन्नपूर्णा बिष्ट ने अपनी ड्यूटी को हमेशा प्राथमिकता दी, लेकिन संगीत के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ। बचपन से ही गाने की शौकीन अन्नपूर्णा ने अपनी प्रतिभा को केवल शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
पुलिस की व्यस्त ड्यूटी के बावजूद उन्होंने संगीत को निखारने के लिए तीन वर्ष की विधिवत संगीत डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपनी गायकी को नया आयाम देते हुए 30 से अधिक गीतों की एल्बम में अपनी आवाज दी। उनकी गायकी में पहाड़ की सादगी, लोक संस्कृति की मिठास और भावनाओं की गहराई साफ झलकती है।
दिग्गज गायकों ने भी सराही प्रतिभा
अन्नपूर्णा बिष्ट की प्रतिभा को जल्द ही बड़े मंच मिलने लगे। छोटे कार्यक्रमों से शुरुआत करने वाली अन्नपूर्णा आज बड़े मंचों की पहचान बन चुकी हैं। भजन सम्राट अनूप जलोटा ने न केवल उनकी प्रतिभा को सराहा, बल्कि ‘उत्तराखंड पुलिस सॉन्ग’ में उनके साथ अपनी आवाज भी दी।
इतना ही नहीं, अन्नपूर्णा बिष्ट को बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक सोनू निगम के साथ भी मंच साझा करने का अवसर मिला। यह उपलब्धि उनके साथ-साथ पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय मानी जाती है।
लोकसंस्कृति की सशक्त आवाज
करीब 19 वर्षों की पुलिस सेवा के दौरान अन्नपूर्णा बिष्ट ने यह साबित कर दिया कि यदि हौसले बुलंद हों तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। ड्यूटी के बीच समय निकालकर रियाज करना और फिर मंचों पर अपनी आवाज का जादू बिखेरना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
अब तक वह तीन दर्जन से अधिक मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। उनकी पहचान केवल एक गायिका के रूप में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति की सशक्त आवाज के रूप में भी बन चुकी है। वे गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी लोकगीतों को अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत कर पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान दे रही हैं।
कई सम्मान और पुरस्कार
उनकी बेहतरीन गायकी और योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों और सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है। अन्नपूर्णा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और उत्तराखंड पुलिस विभाग के अधिकारियों व सहकर्मियों को देती हैं, जिनके सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
कर्तव्य और कला का अनोखा संगम
अन्नपूर्णा बिष्ट आज उस नई सोच और ऊर्जा की प्रतीक बन चुकी हैं, जो यह साबित करती है कि खाकी वर्दी केवल कानून व्यवस्था की पहचान नहीं, बल्कि प्रतिभा और जुनून का भी प्रतीक हो सकती है।
वे कहती हैं—
“मेरे लिए खाकी मेरी जिम्मेदारी है और संगीत मेरी आत्मा। जब तक सांसें हैं, ये दोनों साथ-साथ चलते रहेंगे।”
आज अन्नपूर्णा बिष्ट उत्तराखंड की उन बेटियों में शामिल हो चुकी हैं जिनकी आवाज सुनकर लोग कहते हैं—यह केवल गायन नहीं, बल्कि पहाड़ की आत्मा की गूंज है।