SSC मल्टी टॉस्किंग भर्ती परीक्षा-2025 में नकल की साजिश
देहरादून के महादेव डिजिटल जोन केंद्र पर दबिश
24×24 इंच के गुप्त चेम्बर से 2 लैपटॉप और राउटर बरामद
अभ्यर्थियों से 10 लाख रुपये तक की मांग
दो आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के परीक्षाओं में नकल पर प्रभावी रोक के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए SSC (कर्मचारी चयन आयोग) मल्टी टॉस्किंग भर्ती परीक्षा-2025 में सक्रिय नकल गिरोह का पर्दाफाश किया है। संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ श्री नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि भारत सरकार द्वारा आयोजित SSC मल्टी टॉस्किंग भर्ती परीक्षा-2025 उत्तराखण्ड सहित देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जा रही थी। परीक्षा के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर मोटी रकम मांगने और नकल कराने के इनपुट मिले थे।
पुलिस महानिरीक्षक एसटीएफ डॉ० नीलेश आनन्द भरणे के निर्देश पर एसएसपी एसटीएफ श्री नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में तथा पुलिस उपाधीक्षक एसटीएफ श्री आरबी चमोला के निकट पर्यवेक्षण में टीम गठित की गई।
आज उत्तराखण्ड एसटीएफ और उत्तर प्रदेश एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में देहरादून स्थित महादेव डिजिटल जोन, एमकेपी इण्टर कालेज परीक्षा केंद्र पर दबिश दी गई। परीक्षा लैब के पास यूपीएस रूम में 24×24 इंच का अंडरग्राउंड चेम्बर बनाकर उसमें दो लैपटॉप और राउटर स्वचालित अवस्था में संचालित मिले, जिन्हें रिमोटली चलाया जा रहा था। इन्हीं के माध्यम से प्रश्नपत्र हल कराने की कोशिश की जा रही थी।
टीम ने तकनीकी व फोरेंसिक उपकरणों से सिस्टम को कब्जे में लेकर सील किया। इस मामले में नीतिश कुमार निवासी भाटपार रानी देवरिया (उ.प्र.), हाल निवासी नागलोई दिल्ली तथा भास्कर नैथानी निवासी नथुवावाला, देहरादून को गिरफ्तार किया गया।
आरोपियों के विरुद्ध कोतवाली देहरादून में मु.अ.स. 58/2026 अंतर्गत उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम-2023 की धारा 11(1), 11(2), 12(2), 12(3), बीएनएस की धारा 318(2), 61, 111(3)(4) एवं आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना अपर पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी द्वारा की जाएगी।
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह अभ्यर्थियों से परीक्षा में पास कराने के लिए 10 लाख रुपये की मांग करता था और अत्याधुनिक तकनीक से कंप्यूटर को रिमोट एक्सेस कर प्रश्नपत्र हल करता था। सह-अभियुक्तों की तलाश में दबिश दी जा रही है।