भारत-तिब्बत सीमा की अग्रिम चौकियों और गंगोत्री धाम में जरूरतमंदों तक पहुंची मानवता की गर्माहट
मोनाल एक्सप्रेस, उत्तरकाशी। श्री काशी विश्वनाथ जी की प्रेरणा से श्री काशी विश्वनाथ सेवा मंडल द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी शीतकाल के दौरान भारत-तिब्बत सीमा से लगे दुर्गम एवं अग्रिम क्षेत्रों में सेवा अभियान सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस अभियान का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में कार्यरत श्रमिकों, उनके परिवारों तथा गंगोत्री धाम में साधनारत साधु-संतों को राहत पहुंचाना रहा।
अग्रिम चौकियों पर BRO कर्मियों और श्रमिकों को वितरित की गई आवश्यक सामग्री
सेवा मंडल द्वारा नागा, पीडीए, सुमला, मंडी, जादूंग और नीला पानी सहित सीमांत क्षेत्रों में कार्यरत बीआरओ (BRO) के स्थानीय, नेपाली एवं अन्य राज्यों के श्रमिकों को नेलांग घाटी क्षेत्र में कंबल, दस्ताने, मौजे, मूंगफली, गुड़, चना सहित अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई।
गंगोत्री धाम में साधु-संतों की सेवा
गंगोत्री धाम में साधना में लीन साधु-संतों को भी शीतकाल से बचाव हेतु उपयोगी सामग्री प्रदान की गई। सेवा मंडल द्वारा की गई यह पहल मानव सेवा और आध्यात्मिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण रही।
श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा और पोषण का सहयोग
अभियान के अंतर्गत श्रमिकों के बच्चों को पठन सामग्री, वस्त्र एवं बिस्किट आदि वितरित किए गए, जिससे शिक्षा और पोषण दोनों स्तरों पर उन्हें सहयोग मिल सके।
सेवा कार्य में सहयोगियों का सराहनीय योगदान
इस सेवा अभियान में श्री काशी विश्वनाथ सेवा मंडल के साथ-साथ श्री राजीव चानना एवं श्री विकास दीवान का विशेष योगदान रहा।
इसके अतिरिक्त गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के रेंजर प्रदीप बिष्ट, सुरेन्द्र गंगाड़ी, संजीव अरोड़ा, मनोज भण्डारी, मोहन डबराल, सोबी नेगी, मनदीप रावत, हेमराज बलूनी, अखिल पंत सहित राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन, राजस्थान राइफल्स एवं बीआरओ के अधिकारियों और जवानों का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा।