तीन माह में पद मृत घोषित करने के शासनादेश का विरोध

🔹 अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की उठाई मांग

देहरादून। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक एवं कर्मचारियों के रिक्त पदों को तीन माह में मृत घोषित किए जाने संबंधी शासनादेश को लेकर अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ उत्तराखंड ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। संघ ने इसे अव्यवहारिक, तर्कहीन और शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक बताया है।

संघ के प्रांतीय अध्यक्ष संजय बिजल्वाण एवं प्रांतीय महामंत्री महादेव मैठाणी ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि सचिव शिक्षा द्वारा जारी शासनादेश में यह प्रावधान किया गया है कि यदि तीन माह के भीतर रिक्त पदों पर भर्ती नहीं होती है तो उन्हें मृत घोषित कर दिया जाएगा तथा पुनः भर्ती या स्थानांतरण हेतु निदेशालय से पदों को पुनर्जीवित कराना होगा, जो पूरी तरह अव्यावहारिक है।

🔹 वर्षों से भर्ती पर लगी अघोषित रोक

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि विगत कई वर्षों से अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षक एवं कर्मचारियों की भर्ती पर सरकार एवं शासन स्तर से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोक लगी रही है। वर्तमान में भी भर्ती प्रक्रिया पर अघोषित रोक बनी हुई है। जो भी नियुक्तियां हो रही हैं, वे केवल माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के कारण संभव हो पा रही हैं।

🔹 छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

उन्होंने कहा कि शासन द्वारा लगाई गई भर्ती रोक के कारण विद्यालयों में लंबे समय से शिक्षक नहीं हैं, जिसका सीधा दुष्प्रभाव छात्रों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ रहा है। विषय विशेषज्ञों की भारी कमी के चलते शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

🔹 तीन माह की अवधि अव्यवहारिक

अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया कि रिक्त पदों को मात्र तीन माह में मृत घोषित करना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था के हित में भी नहीं है। संघ पूर्व में भी लिखित मांगपत्र के माध्यम से यह मांग कर चुका है कि रिक्त पदों को मृत घोषित करने की अवधि कम से कम दो वर्ष की जाए।

🔹 भर्ती पर लगी रोक हटाने की मांग

संघ ने सरकार से मांग की है कि

अशासकीय विद्यालयों में शिक्षक एवं कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर लगी अघोषित रोक तत्काल हटाई जाए।

रिक्त पदों को मृत घोषित करने की अवधि बढ़ाई जाए।

अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों एवं अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को भी राजकीय विद्यालयों के समान सभी सुविधाएं और लाभ प्रदान किए जाएं।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही शासनादेश में संशोधन कर मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन आंदोलनात्मक कदम उठाने को बाध्य होगा।

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